Swami Dayanand Saraswati को लोगों ने क्यों दिया था जहर? जानें उनसे जुड़ी 10 रोचक बातें…!

Swami Dayanand Saraswati : कल देश भर में स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती मनाई जाएगी. ऐसे में आइए जानते हैं उनसे जुड़ी 10 बातें-

Published by sanskritij jaipuria

Swami Dayanand Saraswati : स्वामी दयानंद सरस्वती का जीवन भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है. उन्होंने अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में सच्चे ज्ञान और शिक्षा का प्रचार किया. वे आर्य समाज के संस्थापक थे और उनके प्रयासों से समाज में नैतिक और धार्मिक सुधार आए. हर साल उनकी जयंती फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की दशमी को मनाई जाती है.

स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 2026

साल 2026 में स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती मनाई जाएगी.

 तारीख: 12 फरवरी 2026, गुरुवार
 तिथि: फाल्गुन कृष्ण दशमी
 जन्मस्थान: टंकारा, गुजरात
 जन्म: 12 फरवरी 1824

स्वामी दयानंद सरस्वती के बारे में 10 खास बातें

1. बचपन का नाम ‘मूलशंकर’

स्वामी दयानंद का जन्म एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ और उनका नाम मूलशंकर तिवारी रखा गया था. उनका जन्म ‘मूल’ नक्षत्र में हुआ था.

2. चूहे की घटना

एक बार शिवरात्रि के जागरण के दौरान उन्होंने देखा कि एक चूहा भगवान शिव की मूर्ति पर चढ़कर प्रसाद खा रहा है. इस घटना ने उनके मन में मूर्ति पूजा को लेकर सवाल खड़े कर दिए और वे सच्चे ईश्वर की खोज में निकल पड़े.

3. ‘स्वराज्य’ का पहला नारा

स्वराज्य का नारा सबसे पहले स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1876 में दिया था. उनका मानना था, ‘भारत भारतीयों’ के लिए है.

4. वेदों की ओर लौटो

उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा दिया. उनका मानना था कि वेद ज्ञान के शुद्ध और असली स्रोत हैं.

5. जहर दिए जाने पर भी क्षमा

उनके विचारों से कई लोग विरोधी बन गए थे. उन्हें कई बार जहर देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने दुश्मनों को माफ कर दिया और हिंसा से बचने का रास्ता अपनाया.

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6. शुद्धि आंदोलन

स्वामी दयानंद ने उन लोगों को पुनः हिंदू धर्म में शामिल करने के लिए ‘शुद्धि आंदोलन’ चलाया, जिन्होंने किसी कारणवश धर्म परिवर्तन किया था.

7. शिक्षा में क्रांति (DAV स्कूल)

उनकी शिक्षाओं पर दयानंद एंग्लो वैदिक (DAV) स्कूल और कॉलेजों की स्थापना हुई. वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वैदिक मूल्यों के समर्थक थे.

8. ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की रचना

उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखी, ताकि आम जनता इसे आसानी से पढ़ सके और धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझ सके.

9. महिलाओं और दलितों के अधिकार

स्वामी दयानंद ने महिलाओं की शिक्षा और दलितों के मंदिर प्रवेश व वेद पढ़ने के अधिकार के लिए जोरदार आवाज उठाई.

10. विलक्षण याददाश्त

स्वामी दयानंद की स्मरण शक्ति अद्भुत थी. वे वेद और शास्त्रों के हजारों मंत्र और श्लोक बिना देखे याद रख सकते थे. उन्होंने अपने गुरु स्वामी विरजानंद को वचन दिया था कि वे अपना जीवन वेदों के प्रचार में लगाएंगे.

स्वामी दयानंद की उपलब्धियां

 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की.
 सती प्रथा, बाल विवाह और छुआछूत जैसी कुरीतियों का कड़ा विरोध किया.
 एक एकेश्वरवाद (ओंकार) की पूजा पर बल दिया.
 समाज में शिक्षा और नैतिक सुधार के लिए अनगिनत प्रयास किए.

स्वामी दयानंद सरस्वती का जीवन आज भी समाज को जागरूक करने और सही मार्ग दिखाने का प्रेरक उदाहरण है. उनकी शिक्षाओं ने न केवल धार्मिक चेतना जगाई, बल्कि आधुनिक शिक्षा और समाज सुधार की नींव भी रखी.

 

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