Sleeping with Phone Near Head: अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर मोबाइल पास में रखकर सोने से क्या नुकसान होता है? अगर आपको नहीं पता है तो चलिए आज इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हैं. हममें से कई लोगों के लिए मोबाइल फोन रात में आखिरी चीज होती है जिसे हम देखते हैं और सुबह सबसे पहले उसी को उठाते हैं. इसे बेडसाइड टेबल पर रखना या तकिए के नीचे रखना, हमारी आदत बन गई है. पिछले कुछ सालों में इस आदत से रेडिएशन, ब्रेन ट्यूमर और कैंसर को लेकर भी डर पैदा हुआ है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हालांकि ऑनलाइन फैल रहे कुछ ज्यादा चिंताजनक दावों के पीछे कोई सबूत नहीं है. फिर भी सोते समय अपने फोन को सिर के पास रखने से सेहत पर दूसरे ज़रूरी तरीकों से असर पड़ सकता है. खासकर नींद की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है.
मोबाइल पास रखकर सोने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? (What are the health effects of sleeping with your mobile phone nearby?)
यह वह सवाल है जो ज्यादातर लोगों को परेशान करता है और इसका जवाब राहत देने वाला है. कोलकाता के अपोलो कैंसर सेंटर में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की कंसल्टेंट डॉ. अरुंधति डे बताती हैं कि अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है कि मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों से ब्रेन ट्यूमर या कैंसर होता है. डॉ. डे कहती हैं कि आज तक यह साबित नहीं हुआ है कि मोबाइल फोन से निकलने वाली कोई भी रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगें ब्रेन ट्यूमर या कैंसर का कारण बन सकती हैं.
दुनिया भर में किए गए बड़े पैमाने के अध्ययन लंबे समय तक मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर नजर रख रहे हैं, लेकिन मौजूदा डेटा इस दावे का समर्थन नहीं करता है कि सोते समय सिर्फ सिर के पास फोन रखने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. खराब या अधूरी नींद से सिर्फ अगले दिन नींद नहीं आती. नींद की पुरानी कमी का सेहत और रोजमर्रा के कामकाज पर व्यापक असर पड़ता है.
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अधूरी नींद से क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं? (What kind of problems can result from insufficient sleep?)
- सिरदर्द
- थकान और कम एनर्जी
- कमज़ोर एकाग्रता और याददाश्त
- चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव
- कमज़ोर इम्यूनिटी
नींद की कमी से क्या-क्या समस्या हो सकती है? (What problems can be caused by lack of sleep?)
डॉ. डे कहती हैं कि नींद की कमी से आखिरकार सिरदर्द, थकान और कुल मिलाकर सेहत में कमी आ सकती है. रात में पर्याप्त नींद दिमाग की सेहत, हार्मोनल संतुलन और भावनात्मक नियंत्रण के लिए ज़रूरी है, इसलिए नींद की स्वच्छता भी डाइट और एक्सरसाइज जितनी ही जरूरी है. नोटिफिकेशन क्यों जरूरी हैं, तब भी जब आप सो रहे हों. बहुत से लोग मानते हैं कि जब तक फोन की स्क्रीन बंद है, यह नींद पर असर नहीं डालेगा. समय के साथ यह बार-बार होने वाला डिस्टर्बेंस दिमाग को गहरी नींद और REM नींद में पर्याप्त समय बिताने से रोकता है, जो दोनों ही रिकवरी के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
कुछ आसान बदलाव जो आपकी नींद की रक्षा कर सकते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि आपको अपना फ़ोन पूरी तरह से छोड़ने की ज़रूरत नहीं है, बस रात में इसका इस्तेमाल ज़्यादा ध्यान से करें.
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कुछ प्रैक्टिकल कदम हैं: (There are some practical steps)
- अपने फोन को बिस्तर से दूर रखें, अपने सिर के पास नहीं.
- रात में साइलेंट मोड या डू-नॉट-डिस्टर्ब का इस्तेमाल करें.
- सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करने से बचें.
- अगर स्क्रीन का इस्तेमाल ज़रूरी है, तो शाम को ब्लू-लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें.
फोन पास रखकर सोने से नींद में होती है परेशानी (Sleeping with your phone nearby can disrupt your sleep)
डॉ. डे सलाह देते हैं कि क्योंकि स्वस्थ जीवन के लिए रात में पर्याप्त नींद जरूरी है, इसलिए अच्छी नींद के लिए जाते समय फ़ोन को दूर रखना बेहतर है. अपने सिर के पास फोन रखकर सोने से कैंसर नहीं हो सकता है, लेकिन यह चुपचाप आपकी नींद को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसी दुनिया में जहां पहले से ही आराम की कमी है, नींद की क्वालिटी की रक्षा करना एक स्वास्थ्य प्राथमिकता बन गया है. कभी-कभी, सबसे आसान आदत में बदलाव, अपने फ़ोन को थोड़ा और दूर रखना, आपकी नींद की क्वालिटी और अगले दिन आप कितना तरोताज़ा महसूस करते हैं, इसमें एक बड़ा फर्क ला सकता है.

