Sleeping Positions health Risks: नींद की गलत मुद्रा बन सकती है बीमारियों की वजह, जानिए कैसे सोना है सबसे सुरक्षित

Sleeping Positions health Risks: गलत सोने की मुद्रा लंबे समय में गर्दन और कमर दर्द, एसिड रिफ्लक्स, खर्राटे और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है.

Published by Ranjana Sharma

Sleeping Positions health Risks: अच्छी नींद को सेहत की सबसे बड़ी दवा माना जाता है, लेकिन सिर्फ कितनी देर सोते हैं यह ही नहीं, बल्कि किस मुद्रा में सोते हैं, यह भी उतना ही अहम है. डॉक्टर्स के अनुसार गलत तरीके से सोने की आदत लंबे समय में कई शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकती है. गर्दन दर्द, कमर दर्द, एसिडिटी, सांस लेने में दिक्कत और यहां तक कि हृदय संबंधी जोखिम भी गलत सोने की मुद्रा से जुड़े हो सकते हैं.

ये मुद्रा है सबसे खतरनाक

सबसे आम लेकिन जोखिम भरी मानी जाने वाली मुद्रा है पेट के बल सोना. इस स्थिति में गर्दन एक तरफ मुड़ी रहती है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है. लंबे समय तक ऐसा करने से सर्वाइकल स्पाइन में खिंचाव, कंधों में जकड़न और कमर दर्द की समस्या बढ़ सकती है. इसके अलावा पेट के बल सोने से सांस लेने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.

इन लोगों को नहीं सोना चाहिए पीठ के बल

पीठ के बल सोना कई लोगों को आरामदायक लगता है, लेकिन यह सभी के लिए सुरक्षित नहीं है. जिन लोगों को खर्राटे या स्लीप एपनिया की समस्या है, उनके लिए यह मुद्रा सांस रुकने के जोखिम को बढ़ा सकती है. इस स्थिति में जीभ और गले की मांसपेशियां पीछे की ओर खिसक सकती हैं, जिससे वायुमार्ग संकरा हो जाता है. हालांकि, अगर सही तकिए और गद्दे का सहारा मिले तो पीठ के बल सोना रीढ़ को सीधा रखने में मदद भी कर सकता है.

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इस मुद्रा में सोना है सबसे ज्यादा लाभकारी

एक करवट लेकर सोना, विशेषकर बाईं करवट, को अक्सर सबसे स्वास्थ्यप्रद माना जाता है. बाईं ओर सोने से पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है और एसिड रिफ्लक्स की समस्या कम होती है. गर्भवती महिलाओं को भी यही मुद्रा अपनाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे रक्त संचार बेहतर रहता है. हालांकि, बहुत ऊंचा या बहुत पतला तकिया गर्दन में खिंचाव पैदा कर सकता है, इसलिए सिर और गर्दन की सीध बनाए रखना जरूरी है.

शरीर की मरम्मत का समय है नींद

डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सोते समय रीढ़ की हड्डी प्राकृतिक स्थिति में रहे. न तो गर्दन ज्यादा झुकी हो और न ही कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़े. मध्यम कठोरता वाला गद्दा और सही ऊंचाई का तकिया बेहतर नींद में सहायक हो सकता है. इसके अलावा सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है.
नींद सिर्फ आराम का समय नहीं बल्कि शरीर की मरम्मत का समय है. इसलिए सही मुद्रा, संतुलित गद्दा और नियमित नींद का समय अपनाकर कई बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है. 

Ranjana Sharma
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