KBC 2025: गुजरात के बच्चे के बिहेवियर पर छिड़ी सोशल मीडिया पर बहस, क्या पेरेंटिंग के लिए मां-बाप दोषी?

Parenting Style: गुजरात के 10 साल के छोटे KBC कंटेस्टेंट की असभ्यता पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. जानें बच्चों के व्यवहार और माता-पिता की भूमिका के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स.

Published by Shraddha Pandey

KBC Child Controversy: हाल ही में गुजरात से आए एक छोटे बच्चे ने Kaun Banega Crorepati में हिस्सा लिया. लेकिन, इस बार उसे पुरस्कार या तालियों के बजाय सोशल मीडिया पर भारी बहस और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. पाँचवीं क्लास के इस छात्र के जवाब और अमिताभ बच्चन के प्रति उसके बर्ताव को कई दर्शकों ने असभ्य माना, जिससे इंटरनेट पर जोरदार प्रतिक्रियाएँ आईं.

साथ ही, बच्चे के माता-पिता भी ऑनलाइन आलोचना का शिकार हुए. कुछ लोगों ने केवल कुछ मिनटों के टेलीविज़न दृश्य के आधार पर उनकी पालन-पोषण शैली पर सवाल उठाए. लेकिन क्या यह उचित है कि हर समय बच्चों के व्यवहार के लिए माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाए?

ऐसे बच्चों के लिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

डॉ. सुषमा गोपालन, बाल मनोवैज्ञानिक, बताती हैं कि बच्चों का व्यवहार उनके स्वभाव और वातावरण का मिश्रण होता है. “कुछ बच्चे स्वाभाविक रूप से बोल्ड और निडर होते हैं, जबकि कुछ शांत और सतर्क होते हैं. माता-पिता की परवरिश, सामाजिक उदाहरण और भावनात्मक मार्गदर्शन यह तय करते हैं कि ये गुण वास्तविक जीवन में कैसे प्रकट होंगे.”

इसका व्यक्तित्व आधार है, लेकिन पालन-पोषण और सामाजिक अनुभव संरचना बनाते हैं. आत्मविश्वासी बच्चा केवल अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति दिखा सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि उसका पालन-पोषण खराब है.

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नेशनल टीवी पर होना बच्चों के लिए भी तनावपूर्ण होता है. बच्चों के लिए यह और भी जटिल है. उत्साह या घबराहट कभी-कभी असभ्यता या घमंड के रूप में दिखाई दे सकती है. ऐसा अक्सर बच्चों द्वारा भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश होती है, न कि जानबूझकर असभ्य होने की.

किसकी गलती कौन दोषी?

सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स जल्दी निर्णय लेने पर मजबूर करती हैं. लेकिन डॉ. गोपालन कहती हैं कि असली पेरेंटिंग लंबी प्रक्रिया है, जिसमें गलतियों और सीखने के अवसर शामिल होते हैं. हमारी समाजिक मानसिकता आज भी आज्ञाकारिता और प्रदर्शन वाली शिष्टता को महत्व देती है, जबकि असली विकास गलतियों और अनुभवों से होता है.

हर बच्चे को गलतियां करने और सीखने का अधिकार होना चाहिए. केवल कुछ सेकंड की स्क्रीन टाइम को मोरल जजमेंट में बदलना दिखाता है कि यह सब केवल बच्चों के लिए नहीं. हमें भी सहानुभूति और धैर्य सीखने की जरूरत है.

Shraddha Pandey

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