कंधे के एक साइड टांगते हैं बैग तो हो जाएं सतर्क, वरना धीरे-धीरे तबाह हो जाएगा शरीर

एक कंधे पर बैग लटकाने की आदत कंधे, रीढ़ और गर्दन में दर्द, थकान व गठिया जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है. संतुलित बैग उपयोग और सही पोस्चर अपनाकर इससे बचा जा सकता है.

Published by sanskritij jaipuria

भागदौड़ भरी जिंदगी में कई ऐसी छोटी-छोटी आदतें हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती हैं, जो पहली नजर में सामान्य लगती हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं. ऐसी ही एक आम आदत है – बैग को सिर्फ एक कंधे पर लटकाकर चलना. ये आदत चाहे स्टाइल के तौर पर अपनाई गई हो या फिर सुविधा के लिए, शरीर पर इसका प्रभाव धीरे-धीरे दिखता है और ये आदत कंधे की गठिया तक का कारण बन सकती है.

क्यों खतरनाक है एक कंधे पर बैग लटकाना?

हमारा शरीर संतुलन के सिद्धांत पर काम करता है. जब हम एक कंधे पर ही बैग टांगते हैं, तो शरीर का वजन एक ओर झुकने लगता है. इससे मांसपेशियों पर असमान दबाव पड़ता है. एक ओर की मांसपेशियां खिंचती हैं, जबकि दूसरी ओर की मांसपेशियां कमजोर और ढीली पड़ने लगती हैं.

इस असंतुलन के कारण कंधे, गर्दन और पीठ में दर्द, थकान और जकड़न जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. ये प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन समय के साथ ये आदत गंभीर कंधे की गठिया (Shoulder Arthritis) का रूप ले सकती है.

कैसे होती है गठिया जैसी समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, जब लगातार एक ही कंधे पर वजन डाला जाता है तो वहां के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. खासकर Acromioclavicular (AC) Joint और Glenohumeral Joint पर इसका असर अधिक होता है. इन जोड़ो को सहारा देने वाली cartilage (उपास्थि) धीरे-धीरे घिसने लगती है.

ये घिसाव शुरुआत में सूक्ष्म चोटों (microtrauma) का रूप लेता है, जिसे महसूस करना मुश्किल होता है. लेकिन समय के साथ ये स्थिति स्थायी गठिया का कारण बन सकती है, जिसमें कंधे में दर्द, सूजन और हिलाने-डुलाने में दिक्कत होती है.

रीढ़ और गर्दन पर भी पड़ता है असर

ये आदत सिर्फ कंधे को ही नहीं, बल्कि रीढ़ की हड्डी और गर्दन को भी प्रभावित करती है. शरीर जब बैलेंस खोता है तो रीढ़ खुद को संतुलित करने के लिए दूसरी दिशा में झुकने लगती है. इससे spinal alignment (रीढ़ की सीध) बिगड़ सकती है और समय के साथ पोश्चर खराब, गर्दन में जकड़न और सिर दर्द जैसी समस्याएं जन्म ले सकती हैं.

जिन लोगों के कंधे पहले से कमजोर हैं या जिन्हें पहले कभी कंधे की चोट लगी है, उनके लिए यह आदत और भी ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है.

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इन उपायों से बच सकते हैं खतरे से

ऐसे बैग का चुनाव करें जिसे आप दोनों कंधों पर समान रूप से लटका सकें. बैकपैक बैग जिनमें गद्देदार पट्टियां होती हैं, वे ज्यादा बेहतर विकल्प होते हैं.

 बैग का वजन आपके शरीर के वजन का 10 से 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए.

 यदि एक पट्टे वाला बैग इस्तेमाल कर रहे हैं, तो समय-समय पर कंधा बदलते रहें ताकि एक ही कंधे पर दबाव न पड़े.

 नियमित रूप से कंधे, गर्दन और पीठ की एक्सरसाइज करें. इससे आपकी मांसपेशियां मजबूत रहेंगी और चोट या तनाव का खतरा कम होगा.

 चलते समय अपने शरीर का पोस्चर सीधा रखें. झुककर या कंधे को ऊपर-नीचे करके चलने की आदत से बचें.

छोटी लगने वाली ये आदत, जैसे कि एक कंधे पर बैग लटकाना, लंबे समय में शरीर के लिए गंभीर समस्या बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि समय रहते इस पर ध्यान दें और संतुलित जीवनशैली और सही आदतों को अपनाकर खुद को गंभीर बीमारियों से बचाएं. याद रखें, शरीर आपका साथ तभी देगा जब आप उसका ध्यान रखेंगे.

 

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