Benefits Of Coffee: सोशल मीडिया पर आजकल 7 सेकंड कॉफी ट्रिक और इस दावे की बाढ़ आई हुई है कि कॉफी एक जादुई फैट बर्नर है. महंगे सप्लीमेंट्स के बजाय एक साधारण कप कॉफी का आइडिया काफी आकर्षक लगता है. दुनिया भर में वजन घटाने के लिए कॉफी की मांग अब पारंपरिक सिंथेटिक फैट बर्नर की तुलना में तीन गुना ज़्यादा हो गई है. लेकिन क्या कॉफी सच में वजन घटाने में मदद करती है? एक्सपर्ट्स ने इन दावों के पीछे की सच्चाई और सीमाओं का खुलासा किया आइए जानते है.
कैफीन और मेटाबॉलिज्म के बीच संबंध
कॉफी को फैट बर्नर के तौर पर देखे जाने का मुख्य कारण इसमें मौजूद कैफीन है. रीजेंसी हॉस्पिटल (गोरखपुर) के डॉ. विजय शर्मा के अनुसार, कैफीन सेंट्रल नर्वस सिस्टम को स्टिमुलेट करता है और एड्रेनालाईन हार्मोन रिलीज करता है. यह शरीर को एनर्जी के लिए जमा फैट को ‘फ्री फैटी एसिड’ में तोड़ना शुरू करने का संकेत देता है.
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इस प्रक्रिया को थर्मोजेनेसिस कहा जाता है, जो आपके रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट (RMR) को बढ़ाती है. डॉ. शर्मा बताते हैं कि कॉफी पीने के कुछ घंटों बाद मेटाबॉलिज्म 3 से 11 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. वहीं आकाश हेल्थकेयर के डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा के अनुसार, वर्कआउट से पहले कॉफी पीने से फैट का बेहतर इस्तेमाल होता है.
कॉफी से जुड़ी सावधानियां और सीमाएं
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कॉफी सीधे फैट नहीं जलाती है. बल्कि एक सहायक भूमिका निभाती है. अगर आप अपनी ब्लैक कॉफी में चीनी, दूध या क्रीम मिलाते हैं, तो इसके सारे फायदे खत्म हो जाता है. फोर्टिस हॉस्पिटल (बेंगलुरु) की चीफ डाइटिशियन शालिनी अरविंद के अनुसार, कैफीन कुछ समय के लिए भूख को कम कर सकता है, लेकिन मोटापा एक जटिल बीमारी है जिसे साधारण ‘ट्रिक्स’ से ठीक नहीं किया जा सकता है.
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संतुलित आहार और जीवनशैली जरूरी है. ज़्यादा सेवन के जोखिम स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन 300-400 mg कैफीन सुरक्षित है. इससे ज़्यादा सेवन करने से ये समस्याएं हो सकती है. चिंता, नींद न आना और एसिडिटी आम लक्षण है. स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने से पेट के आसपास फैट जमा हो सकता है. देर रात कॉफी पीने से नींद खराब होती है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और वजन बढ़ सकता है.

