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Train Engine Net Facts: क्या आपने कभी सोचा है ट्रेन के इंजन पर जाली क्यों होती है?

Train Engine Facts: क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेन और इंजन पर लगी हुई जाली ग्रिल का मतलब क्या होता है, वो क्यों लगाई जाती है. आइए जानते हैं उसके पीछे की वजह-

Published by sanskritij jaipuria

Train Engine Facts: आज-कल हर कोई ट्रेन से ट्रेवल करता रहता है, लोगों के लिए आज के समय में ट्रेन से यात्रा करना आमबात है. बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो महीने में कई बार ट्रेन से यात्रा करते हैं और उसी दौरान लोगों को बहुत सी चीजे देखने को मिलती है जैसे पटरी पर पड़े हुए पत्थर, रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर लिखी हुई हाइट या फिर इंजन पर लगी हुई ग्रिल. हर कोई इसे देखता तो अक्सर है लेकिन इसके पीछे की वजह किसी को नहीं पता होती है. लोगों के मन में एक सवाल जरूर रहता है वो है इंजर पर लगी हुई ग्रिल. वो क्यों लगी है उसके पीछे की वजह क्या है. तो आइए जानते हैं सबकुछ डिटेल में-

ट्रेन के इंजन जरूरी हिस्से

ट्रेन के इंजन में बहुत से जरूरी हिस्से लगे होते हैं. ये इंजन को मजबूत बनाने, पहियों को घुमाने और सेफ चलाने का काम करते हैं. ट्रेन को कंट्रोल करने के लिए लोको पायलट थ्रॉटल, ब्रेक लीवर और गेज का यूज करता है. इसके अलावा इंजन की कूलिंग पंखे,कप्रेसर और अन्य चीजे भी काम करती है. ट्रेन के फ्यूल की खपत अलग-अलग होती है. पैसेंजर ट्रेनों को 1 किलोमिटर चलाने के लिए से 5-6 लीटर फ्यूल लगता है. वहीं मालगाड़ियों के लिए भार और स्पीड पर सब निर्भर होता है.

ट्रेन की खिड़की में जाली क्यों लगाई जाती?

अब बात करते हैं जाली को लेकर तो हम आपको बताएंगे की ट्रेन के इंजन में जाली क्यों लगी होती है. जाली इसलिए लगाई जाती है ताकि सेफटी हो सके. जो ट्रेन हाई स्पीड चलती है उनकी वजह से पटरी से उड़े पत्थर,धूल और अन्य चीदें शिशे से टकरा सकती हैं. अगर ऐसा सच में हो जाए तो इसकी वजह से लोको पायलट को चोट लग सकती है और बड़ा एक्सीडेंट हो सकता है. इसलिए जाली लगाने से सबकुछ सेफ रहता है.

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जाली का काम क्या है?

इंजन की खिड़की पर लगी हुई जाली लोको पायलट को उन चीजों से बचाती है जो ट्रेन के सामने से टकरा सकती हैं. शताब्दी और राजधानी जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों में जाली और ज्यादा जरूरी होती है क्योंकि इनकी स्पीड काफी तेज होती है. खिड़की के लगे होने की वजह से शीशा टूटता नहीं है. इंजन के अलावा पुरी ट्रेन में ग्रिल लगी होती है इससे लोग खिड़की से बाहरसिर नहीं निकाल पाते हैं और झांक नहीं पाते. वहीं वंदे भारत जैसी ट्रेनों में ग्रिल नहीं होती है क्योंकि इन ट्रेनों में मजबूत और महंगी आर्मर्ड ग्लास का यूज होता है. आर्मर्ड ग्लास पत्थरों और तेज वस्तुओं से आसानी से नहीं टूटता.

 

sanskritij jaipuria

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