Indian Army Story: भारतीय सेना सिर्फ हमारी सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं करती, बल्कि संकट के हर मौके पर मानवता की रक्षा का भी प्रतीक है. इसी सच को मेजर विश्वदीप सिंह अत्री (Vishavdeep Singh Attri) ने एक बार फिर साबित किया, जब उनकी निस्वार्थ बहादुरी ने दो छोटे बच्चों की जान बचा ली. इस अद्वितीय साहस के लिए उन्हें 2026 के गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले भारत के राष्ट्रपति द्वारा जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया गया. खास बात ये है कि वे JAG डिपार्टमेंट के पहले अधिकारी हैं, जिन्हें ये वीरता पुरस्कार मिला.
कौन है मेजर विश्वदीप सिंह अत्री?
मेर अत्री पंजाब के रूपनगर जिले के रहने वाले हैं, जो अपने वीर सपूतों के लिए जाना जाता है. उनका सैन्य जीवन अनुशासन, न्याय और जिम्मेदारी की मिसाल रहा है. भारतीय सेना के जज एडवोकेट जनरल (JAG) डिपार्टमेंट में कार्य करते हुए, उन्होंने सैन्य कानून और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में गहरी समझ विकसित की.
वर्तमान में वे स्पीयर कॉर्प्स से जुड़े हैं और नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मिलिट्री लॉ में इंस्ट्रक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. घटना के समय उनकी तैनाती नागालैंड के दीमापुर स्थित रंगापहाड़ मिलिट्री स्टेशन में थी.
धनसिरी नदी में बहादुरी की परीक्षा
28 अक्टूबर 2024 का दिन मेजर अत्री के जीवन का सबसे निर्णायक पल बन गया. छुट्टी पर होने के बावजूद उन्होंने एक मां की चीखें सुनीं उसके दो छोटे बच्चे तेज धारा वाली धनसिरी नदी में बह रहे थे. बच्चे लगभग 30–35 मीटर तक नदी में चले गए थे और हर सेकंड उनके जीवन पर संकट बढ़ता जा रहा था.
बिना एक पल गंवाए, मेजर अत्री ने नदी में छलांग लगा दी. तेज बहाव और अपने जीवन के खतरे के बावजूद, उन्होंने दोनों बच्चों को सेफ बाहर निकाल लिया. ये सिर्फ साहस नहीं, बल्कि इंसानियत की गहराई का प्रतीक था.
किन लोगों को मिलता है जीवन रक्षा पदक?
जीवन रक्षा पदक उन असाधारण लोगों को दिया जाता है, जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं. मेजर अत्री का ये सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि JAG डिपार्टमेंट के लिए भी ऐतिहासिक क्षण है. ये साबित करता है कि सेना की हर भूमिका चाहे कानूनी हो या ऑपरेशनल साहस और सेवा से जुड़ी होती है.
मेर अत्री की कहानी पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है. पंजाब से नागालैंड तक उनके इस साहसिक कार्य ने सेना और आम जनता के बीच भरोसा और सम्मान और मजबूत किया. उन्होंने ये साबित कर दिया कि एक सैनिक कभी भी ड्यूटी से बाहर नहीं होता, क्योंकि इंसानियत की रक्षा ही उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.

