Who is Mukul Roy: पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया. 71 वर्षीय नेता ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान देर रात अंतिम सांस ली. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक नेताओं में रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़े. 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दलबदल विरोधी कानून के तहत उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य ठहराया था. वे अपने पीछे परिवार और करोड़ों रुपये की घोषित संपत्ति छोड़ गए हैं.
राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में थे. जनवरी 1998 में पार्टी गठन के बाद उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर संगठन को मजबूत किया. दोनों ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पश्चिम बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी. रॉय को पार्टी का महासचिव बनाया गया और वे दिल्ली की राजनीति में टीएमसी का प्रमुख चेहरा बने. 2006 में वे राज्यसभा सदस्य चुने गए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे. यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले जहाजरानी राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई और मार्च 2012 में रेल मंत्री बने. रणनीतिक कौशल के कारण बंगाल की राजनीति में उन्हें ‘चाणक्य’ भी कहा जाता था.
बीजेपी में जाना और आना
नवंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई और 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 18 सीटें दिलाने का श्रेय भी उन्हें दिया गया.
2021 के विधानसभा चुनाव में वे कृष्णानगर उत्तर सीट से बीजेपी विधायक चुने गए. हालांकि, जून 2021 में वे फिर टीएमसी में लौट आए. वापसी के बाद उनकी सक्रियता पहले जैसी नहीं रही.13 नवंबर 2025 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2021 में बीजेपी टिकट पर जीतने के बाद टीएमसी में शामिल होने के मामले में दलबदल विरोधी कानून के तहत उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य ठहरा दिया था.
परिवार
मुकुल रॉय अपने पीछे पत्नी और पुत्र शुभ्रांशु रॉय सहित परिवार छोड़ गए हैं. शुभ्रांशु रॉय भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न समय पर अलग-अलग दलों से जुड़े रहे.
संपत्ति
चुनावी हलफनामों के अनुसार, मुकुल रॉय और उनके परिवार के पास कोलकाता और आसपास के इलाकों में अचल संपत्ति, आवासीय मकान और भूखंड थे. इसके अलावा बैंक जमा, निवेश और अन्य चल संपत्तियां भी उनके नाम पर दर्ज थीं. वर्षों के राजनीतिक जीवन के दौरान उनकी घोषित कुल संपत्ति करोड़ों रुपये में बताई गई थी. बंगाल की राजनीति में मुकुल रॉय का नाम एक कुशल रणनीतिकार के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अलग-अलग दौर में दोनों प्रमुख दलों के साथ अहम भूमिका निभाई.

