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Wheelchair user space flight: अब व्हीलचेयर पर बैठकर अंतरिक्ष जाएगी ये महिला, 2018 में टूट गई थी रीढ़ की हड्डी, 12 मिनट में पलटेगी दुनिया

Wheelchair user space flight: Blue Origin की उड़ान NS-37 में पहली बार व्हीलचेयर यूजर महिला Michi Benthaus अंतरिक्ष जाएंगी. ये मिशन समावेश, सपनों और समान अवसर का संदेश देता है.

Published by sanskritij jaipuria

Wheelchair user space flight: अंतरिक्ष की दुनिया में अब एक बहुत खास मौका आने वाला है. Blue Origin कंपनी अपने New Shepard रॉकेट से एक उड़ान शुरू कर रही है. इस उड़ान में पहली बार व्हीलचेयर यूजर महिला अंतरिक्ष जाएंगी. ये दिखाता है कि अब अंतरिक्ष सिर्फ कुछ चुने हुए लोगों के लिए नहीं रहा. सबको मौका मिलने लगा है.

इस उड़ान में Michaela ‘Michi’ Benthaus शामिल हैं. वो व्हीलचेयर यूजर हैं और European Space Agency (ESA) में एयरोस्पेस इंजीनियर भी हैं. 2018 में माउंटेन बाइकिंग के दौरान उन्हें चोट लगी और उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अंतरिक्ष के अपने सपने को और मजबूत किया. Michi ने पहले भी कुछ स्पेस ट्रेनिंग और रिसर्च उड़ानें की हैं. अब वो Blue Origin के जरिए अंतरिक्ष जाएंगी.

मिशन NS-37: उड़ान की जानकारी

ये मिशन NS-37 कहा जाता है. ये New Shepard रॉकेट की 37वीं उड़ान है और 16वीं मानव मिशन फ्लाइट भी. भारत के समय के अनुसार ये उड़ान रात 9.30 बजे होगी. उड़ान का समय लगभग 10-12 मिनट होगा. रॉकेट 100 किलोमीटर ऊंचाई तक जाएगा. इस ऊंचाई के ऊपर ही अंतरिक्ष शुरू होता है. यात्रियों को कुछ मिनट जीरो ग्रैविटी का अनुभव मिलेगा और वे धरती को ऊपर से देख सकेंगे.

मिशन में अन्य यात्री

Michi Benthaus के साथ इस उड़ान में 5 और लोग भी हैं. इनमें हैं:

 एक फिजिक्स वैज्ञानिक
 एक रिटायर्ड निवेशक
 एक पहले के स्पेस कंपनी के अधिकारी
 एक खनन इंजीनियर
 एक कंप्यूटर साइंटिस्ट

हर यात्री की अपनी कहानी है. लेकिन मिशन की पहचान Michi से जुड़ी है. ये उड़ान उन लोगों की भी आवाज है, जिन्हें लंबे समय तक अंतरिक्ष से दूर रखा गया.

मिशन पैच और संदेश

मिशन पैच में एक छोटा खिलौना, टेनिस बॉल और टूटी हुई रेखाएं दिखाई गई हैं. इसका मतलब है कि ये मिशन शारीरिक कमजोरी, देश या पैसे जैसी बाधाओं को पार करने का प्रतीक है. Michi का खिलौना उनके अस्पताल के समय की याद दिलाता है. ये दिखाता है कि मेहनत और हिम्मत से सपना पूरा किया जा सकता है.

समावेश और नया बदलाव

Blue Origin पहले ही 80 से ज्यादा लोगों को अंतरिक्ष ले जा चुकी है. लेकिन ये उड़ान खास है क्योंकि ये समावेश का संदेश देती है. पहले अंतरिक्ष एजेंसियां दिव्यांग लोगों को मिशन में नहीं लेती थीं. अब हालात बदल रहे हैं. ESA का Parastronaut प्रोजेक्ट और AstroAccess जैसी पहलें यही दिखाती हैं.

लाइव देख सकते हैं

अगर मौसम ठीक रहा, तो ये मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च होगा. इसे Blue Origin की वेबसाइट और YouTube पर लाइव देखा जा सकता है. ये उड़ान दिखाती है कि भविष्य का अंतरिक्ष केवल तकनीक का नहीं, बल्कि समान अवसर और प्रेरणा का भी होगा.

 

sanskritij jaipuria

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