Pramod Jadhav Satara: महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के ‘आरे दरे’ गांव में वह दिन कभी नहीं भुलाया जा सकेगा, जब पूरा गांव गहरे दुख में डूब गया था. गांव की हर गली में सन्नाटा पसरा था, हर चेहरा उदास था और हर आंख में आंसू थे. जब तिरंगे झंडे में लिपटा एक शव गांव से गुज़रा तो लोग हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर खड़े थे. यह भारतीय सेना के जवान प्रमोद जाधव की अंतिम यात्रा थी, जिन्हें गांव वाले नम आंखों से विदाई दे रहे थे.
बिना पिता के बेटी का जन्म
प्रमोद जाधव की मौत के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया. एक तरफ एक नई ज़िंदगी शुरू हो रही थी, और दूसरी तरफ एक ज़िंदगी खत्म हो गई थी. जिस पिता को पहली बार अपनी बेटी को गोद में लेना था, वह हमेशा के लिए इस दुनिया से चला गया था. मासूम बच्ची इस दुनिया में आ गई थी, लेकिन वह कभी अपने पिता का चेहरा नहीं देख पाएगी. यह दृश्य सबके लिए दिल दहला देने वाला था.
A journey meant to bring happiness ended in deep sorrow. Indian Army soldier Pramod Parshuram Jadhav was travelling to meet his newborn daughter when tragedy struck. Instead of welcoming him home with smiles, his family had to give him a final farewell wrapped in the tricolour. pic.twitter.com/97BlipKcqk
— SANATAN (@Eternaldharma_) January 12, 2026
आठ घंटे की बच्ची अपने पिता से मिली
अंतिम विदाई के समय, सिर्फ आठ घंटे पहले जन्मी बेटी को उसके पिता के पास लाया गया. दुनिया से अनजान मासूम बच्ची तिरंगे झंडे में लिपटे अपने पिता के सामने चुप थी. वहीं पत्नी हॉस्पिटल से स्ट्रेचर पर लेटी हुई अपने पति को रोते विलखते हुए अंतिम विदाई देने पहुंची. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद बुजुर्गों, युवाओं और गांव वालों की आंखें नम हो गईं. हर कोई इस दिल दहला देने वाले पल का गवाह बना.
कुछ दिन पहले ही छुट्टी पर घर आए थे
प्रमोद जाधव कुछ दिन पहले ही छुट्टी पर घर आए थे. घर में खुशी का माहौल था क्योंकि उनकी पत्नी गर्भवती थीं और परिवार बेसब्री से एक नए सदस्य के आने का इंतज़ार कर रहा था. हर कोई नई ज़िंदगी के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. एक दुखद सड़क हादसे ने प्रमोद जाधव की जान ले ली, और खुशियों से भरा घर अचानक मातम में डूब गया.
आखिरी दर्शन का भावुक पल
जब गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं, तो सेना और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। सबसे भावुक पल तब आया जब प्रमोद जाधव की पत्नी को आखिरी दर्शन के लिए स्ट्रेचर पर अस्पताल से लाया गया. उन्होंने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया था, उनका शरीर कमज़ोर था, लेकिन पति को आखिरी बार देखने की चाह उन्हें वहां ले आई थी. उनकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे, और उनका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था।
सम्मानजनक अंतिम विदाई
प्रमोद जाधव को सेना ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी. गोलियों की आवाज़ गूंजी, लेकिन उस आवाज़ के साथ एक परिवार की टूटी हुई खुशियों को भी महसूस किया जा सकता था. गांव वाले, रिश्तेदार और अधिकारी सभी गहरे दुख में थे.