नोएडा से अली खान की रिपोर्ट
Noida: नोएडा में सोमवार को समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भारी तनातनी देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के नेता विकास जतन प्रधान के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता दिल्ली तक साइकिल यात्रा निकालना चाहते थे। यह यात्रा दरअसल SIR के विरोध में प्रस्तावित की गई थी। लेकिन इससे पहले कि यह यात्रा शुरू हो पाती, पुलिस ने सपाइयों को रोक दिया और उन्हें डिटेन कर लिया।
पुलिस ने सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया
जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब एक बजे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस यात्रा की शुरुआत महामाया फ्लाईओवर से करने का ऐलान किया था। कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर दिल्ली की ओर कूच करने की तैयारी में थे। लेकिन पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए कार्यकर्ताओं को पहले ही रोक लिया। बताया जा रहा है कि सपा कार्यकर्ता महामाया फ्लाईओवर के नीचे जुटने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें फ्लाईओवर से पहले ही रोककर हिरासत में ले लिया।
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पुलिस ने उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की
वहीं, समाजवादी पार्टी नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि कई वरिष्ठ नेताओं को तो सुबह से ही घर पर रोक लिया गया। सपा कार्यकर्ताओं के मुताबिक, विकास जतन भाटी और सपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार भाटी समेत जिले के कई प्रमुख नेताओं के घर सुबह-सुबह पुलिस पहुंच गई थी। नेताओं का कहना है कि उन्हें घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया। सपा नेताओं ने इसे “हाउस अरेस्ट” करार दिया है और प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाया है।
नोएडा पुलिस ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया
हालांकि, दूसरी तरफ नोएडा पुलिस ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नेता या कार्यकर्ता को घर पर नज़रबंद नहीं किया गया। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि समाजवादी पार्टी ने इस साइकिल यात्रा के लिए प्रशासन से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली थी। ऐसे में बिना अनुमति यात्रा निकालने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
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सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच लगातार बहसबाजी
सोमवार को पूरे घटनाक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच लगातार बहसबाजी होती रही। पुलिस का रुख सख्त रहा और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हर स्तर पर कड़ी निगरानी रखी गई। वहीं, सपाइयों का कहना है कि आंदोलन और विरोध करना उनका अधिकार है, लेकिन पुलिस ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने के अधिकार को भी कुचल दिया।

