Nitin Nabin: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को छह साल बाद नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है. BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार (19 जनवरी) को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन फाइल किया है. BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए पार्टी के लगभग सभी मुख्यमंत्री प्रदेश यूनिट के प्रमुख और दूसरे बड़े नेता दिल्ली में पार्टी हेडक्वार्टर में मौजूद थे. नितिन नबीन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, नितिन गडकरी और दूसरे सीनियर नेताओं की मौजूदगी में BJP हेडक्वार्टर में अपना नॉमिनेशन फाइल किया है.
नए साल में नितिन नबीन के सामने 10 सबसे बड़ी चुनौतियां
- बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों ने संभाला है. ऐसे प्रतिष्ठित नेताओं की विरासत को आगे बढ़ाना कोई आसान काम नहीं है. इन नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को ज़मीन से उठाकर दो सांसदों से सत्ता के शिखर तक पहुंचाया है. ऐसे महान नेताओं की जगह लेना एक युवा नेता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है.
- फिलहाल राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और जे.पी. नड्डा जैसे पूर्व अध्यक्ष सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर है. युवा नितिन नबीन को इन वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर काम करने में धैर्य और समझदारी दिखानी होगी. ठीक वैसे ही जैसे युवा महेंद्र सिंह धोनी ने सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों और पूर्व कप्तानों के साथ तालमेल बिठाकर टीम को जीत दिलाई थी.
- नितिन नवीन की पहली और सबसे बड़ी चुनौती पांच राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी) में 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जीत दिलाना है. उनके संगठनात्मक कौशल की सबसे बड़ी परीक्षा पश्चिम बंगाल में होगी. इस बार बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनाव लड़ रही है. असम में सत्ता बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है.
- युवा नितिन नबीन को यह महत्वपूर्ण पद इसलिए दिया गया है ताकि वे बीजेपी को भविष्य की पार्टी बना सकें. 2029 तक बीजेपी को नई पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाने की ज़िम्मेदारी उन पर है. नितिन नबीन को यह तय करने में समझदारी दिखानी होगी कि पीएम मोदी और अमित शाह के दौर में बीजेपी कैसी दिखेगी.
- बीजेपी की कई राज्य इकाइयों में गुटबाज़ी के कारण पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई पार्टी नेता आपस में लड़ रहे है. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ जैसे मजबूत नेता के खिलाफ भी जबरदस्त गुटबाज़ी थी. जिसके कारण 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी सिर्फ़ 33 सीटों पर सिमट गई और 29 सीटों का नुकसान हुआ.
- अब यह देखना होगा कि नितिन नबीन इन गुटबाज़ी के विवादों को कैसे सुलझाते है. नितिन नबीन के लिए अपने गृह राज्य बिहार की राजनीति को संभालना एक बड़ी चुनौती होगी. नीतीश कुमार के साथ बीजेपी के रिश्ते कैसे होंगे? क्या अब बीजेपी खुलकर बड़े पार्टनर की भूमिका निभाएगी? पार्टी भविष्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने का सपना देख रही है. वे इस सपने को सच करने में किस हद तक कामयाब होंगे?
- सत्ताधारी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर उन्हें विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देने के लिए तथ्यों से पूरी तरह तैयार रहना होगा. सरकार और पार्टी दोनों की इमेज बनाए रखने की अहम ज़िम्मेदारी उनके कंधों पर है.
- बीजेपी कई सालों से दक्षिणी राज्यों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. केरल के तिरुवनंतपुरम में मेयर का पद जीतने के बाद पार्टी काफी उत्साहित है. तमिलनाडु में चार महीने बाद विधानसभा चुनाव होने है. इस संदर्भ में नितिन नबीन के सामने पार्टी के प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की चुनौती है.
- फिलहाल बीजेपी अपने सहयोगियों के समर्थन से केंद्र में सरकार चला रही है. बीजेपी पर अक्सर अपने गठबंधन सहयोगियों का सम्मान न करने का आरोप लगता है. गठबंधन की राजनीति में NDA को एकजुट रखने के लिए इस धारणा को तोड़ना बहुत जरूरी होगा.
- पार्टी संगठन और सरकार के बीच तालमेल बिठाना, लाखों पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को सरकार तक पहुंचाना, और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना एक अहम ज़िम्मेदारी होगी. नितिन नबीन को एक पुल की भूमिका निभानी होगी.