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NXT Summit 2026: डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा ने कैंसर को लेकर किया आगाह, खतरनाक बीमारी को लेकर दिए अहम सुझाव

NXT Summit 2026: दुनिया का सबसे बड़ा ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन है. ये पहल कैंसर के खिलाफ लोगों की लड़ाई में एक जरूरी कदम है. जब हमने इस पहल के बारे में सोचना शुरू किया, तो हमारे मन में एक ही चिंता थी कैंसर आज देश में तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक बन चुका है.

By: sanskritij jaipuria | Last Updated: March 13, 2026 8:51:25 PM IST



NXT Summit 2026: नई दिल्ली में ‘एनएक्सटी समिट 2026’ के दूसरे दिन (13 मार्च, 2026) को पधारे विशेषज्ञ मेहमानों ने विभिन्न विषयों पर अपनी राय रखीं. इसी कड़ी में संडे गार्डियन फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा ने कैंसर को लेकर कई अहम बातें कहीं. उन्होंने बताया कि कैंसर अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है. ‘नमो शक्ति’ मिशन दुनिया का सबसे बड़ा ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन है. ये पहल कैंसर के खिलाफ लोगों की लड़ाई में एक जरूरी कदम है. जब हमने इस पहल के बारे में सोचना शुरू किया तो हमारे मन में एक ही चिंता थी कि कैंसर आज देश में तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक बन चुका है.

कैंसर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये चुपचाप शरीर में प्रवेश करता है और जब तक पता चलता है तब तक अक्सर देर हो चुकी होती है. ये बीमारी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भय भी पैदा करती है. जब किसी परिवार को पता चलता है कि उसकी मां, बहन, बेटी या किसी महिला सदस्य को कैंसर है, तो पहले लोग सदमे में आ जाते हैं और उसके बाद अनिच्छा के साथ उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू होती है. इस डर और झिझक को दूर करना बहुत जरूरी है.

 भारत में ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति

यहां पर बता दें कि भारत में हर साल लगभग 2.3 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं. इनमें से लगभग 25% मामले महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के होते हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि भारत में करीब 60% ब्रेस्ट कैंसर के मामले तीसरे या चौथे चरण में ही पता चलते हैं. उस समय इलाज कठिन हो जाता है. मृत्यु दर बढ़ जाती है और कई बार सर्जरी ही एकमात्र ऑप्शन बचता है.

 ग्रामीण भारत में जागरूकता की कमी

ग्रामीण क्षेत्रों में हमने एक बड़ा अंतर देखा. कई ग्रामीण महिलाओं को ये जानकारी ही नहीं थी कि कैंसर की समय पर जांच कितनी जरूरी है. जब हम ‘नमो शक्ति’ मिशन के तहत विभिन्न कैंपों में गए और निरमई की थर्मल तकनीक के माध्यम से जांच शुरू की, तो शुरुआत में कई महिलाएं संदेह में थीं. खासकर बुजुर्ग महिलाओं ने पहले कभी कैंसर स्क्रीनिंग नहीं करवाई थी और न ही किसी ने उन्हें स्वयं जांच (Self Examination) के बारे में बताया था.

हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और जिला स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने उन्हें कुछ जानकारी दी, लेकिन फिर भी बहुत कम महिलाएं नियमित रूप से स्वयं जांच करती थीं, जबकि यह कैंसर की शुरुआती पहचान का एक प्रभावी तरीका है.

 सामाजिक कलंक और आर्थिक चिंता

कई महिलाओं को यदि ब्रेस्ट में कोई गांठ महसूस भी होती थी, तो वे डर और सामाजिक कलंक के कारण अपने परिवार को नहीं बताती थीं. एक बड़ी चिंता इलाज के खर्च की भी होती थी, क्योंकि भारत में कैंसर का इलाज काफी महंगा होता है.

लेकिन आयुष्मान भारत योजना ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. इस योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध है. हमें केवल लोगों को ये बताना था कि ये सुविधा उनके लिए मौजूद है और वे इसका लाभ ले सकते हैं.

 नई तकनीक से आसान जांच

एक और बड़ी समस्या थी जांच की प्रक्रिया को लेकर डर और गोपनीयता की चिंता. निरमई द्वारा विकसित तकनीक और डॉ. गीता के सहयोग से हमने ये संदेश लोगों तक पहुंचाया कि अब कैंसर की जांच बिना रेडिएशन, बिना दर्द और बिना स्पर्श के भी संभव है. ये तकनीक ग्रामीण महिलाओं के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुई. इससे वे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे आईं और जांच करवाने के लिए प्रेरित हुईं.

 जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी

इस मिशन को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. भारत के विभिन्न राज्यों में जिला प्रशासन और स्थानीय समुदायों के सहयोग से महिलाओं को आगे आने और स्क्रीनिंग कराने के लिए प्रेरित किया गया.

मैंने इस मिशन के दौरान महसूस किया कि कैंसर से लड़ने के लिए केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि एक मजबूत समुदाय की भी जरूरत होती है. जब महिलाएं एक साथ आती हैं और जागरूकता फैलाती हैं, तो बदलाव तेजी से आता है.

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