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चंडीगढ़ बिल पर मचा बवाल, केंद्र सरकार आई बैकफुट पर! जानें MHA ने अपने ताजा बयान में क्या कुछ कहा?

Chandigarh News: विरोधियों का आरोप था कि यह बिल चंडीगढ़ के लिए एक स्वतंत्र लेफ्टिनेंट गवर्नर या स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति का रास्ता खोल सकता है.

Published by Shubahm Srivastava

Centre Bill To Take Chandigarh: चंडीगढ़ को संविधान के आर्टिकल 240 में शामिल करने से जुड़े प्रस्ताव पर पंजाब में मचे राजनीतिक घमासान के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस संबंध में कोई भी फैसला अभी विचाराधीन है और आगामी विंटर सेशन में इस पर कोई बिल पेश करने की योजना नहीं है. 

यह बयान उस समय आया जब लोकसभा के कामकाज की टेंटेटिव लिस्ट में संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2025 को शामिल किया गया था, जिसमें चंडीगढ़ को उन केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में लाने का सुझाव था जिन पर आर्टिकल 240 लागू होता है—जैसे अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, तथा विशेष परिस्थितियों में पुडुचेरी.

पंजाब में हो रहा इसका विरोध

इस सूची के सार्वजनिक होने के बाद पंजाब में कड़ा विरोध शुरू हो गया. विरोधियों का आरोप था कि यह बिल चंडीगढ़ के लिए एक स्वतंत्र लेफ्टिनेंट गवर्नर या स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति का रास्ता खोल सकता है. फिलहाल, 1984 से पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के एडमिनिस्ट्रेटर की भूमिका निभाते आए हैं. पंजाब की राजनीतिक पार्टियों ने इसे राज्य के चंडीगढ़ पर दावे को कमजोर करने का प्रयास बताया—क्योंकि चंडीगढ़ न केवल पंजाब बल्कि हरियाणा की भी राजधानी है.

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गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर क्या कुछ कहा?

विवाद बढ़ने के बाद गृह मंत्रालय (MHA) ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत बयान जारी किया. मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए कानून निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केवल विचार-विमर्श के चरण में है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. MHA ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव न तो चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करता है और न ही पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से चली आ रही परंपरागत व्यवस्थाओं को प्रभावित करता है. मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि इस पर कोई भी फैसला लेने से पहले सभी हितधारकों से विस्तृत चर्चा की जाएगी.

कांग्रेस हुई सरकार पर हमलावर

गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद भी राजनीतिक प्रतिक्रिया जारी रही. विपक्षी कांग्रेस ने केंद्र पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह केंद्र सरकार के “पहले घोषणा, बाद में सोच” वाले रवैये का एक और उदाहरण है.

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के लिए फुल-टाइम LG नियुक्त करने संबंधित संशोधन बिल पहले से ही संसद के बुलेटिन में शामिल था और इसी वजह से पंजाब की विभिन्न पार्टियों ने इसका जोरदार विरोध किया. 

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Shubahm Srivastava

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