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दुनिया के लिए एक कड़ा सबक, पीरियड्स के दर्द को मामूली समझना पड़ सकता है भारी

कर्नाटक से बेहद ही हैरान करने वाला मामला (Shocing Incident) सामने आया है, जहां पीरियड्स के दर्द (Painful Periods Pain) एक 19 साल की युवती ने दम तोड़ दिया.

By: DARSHNA DEEP | Published: January 13, 2026 5:04:09 PM IST



Menstrual Pain Death: अगर आपको भी पीरियड्स के समय गंभीर दर्द होता है तो यह खबर आपके लिए है और साथ ही आपको अब सावधान होने की सबसे ज्यादा ज़रूरत है. कर्नाटक से बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया जिसने सभी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है. आखिर क्या है पूरा मामला जानने के लिए पूरी खबर पढ़िए और साथ ही अपनी बहनें, माताओं, पत्नी, बेटियों को भी सर्तक रहने के बारे में जानकारी देना न भूलें. 

पीरियड्स के दर्द ने कैसे ली जान?

दरअसल, मासिक धर्म (Menstruation) का गंभीर दर्द और उससे जुड़ी मानसिक पीड़ा एक ऐसी हकीकत है जिसे ज्यादातर बंद कमरों और दबी आवाज़ों तक सीमित रखा जाता है. ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला कर्नाटक से सामने आया है, जहां  19 साल की कीर्तना की दुखद कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब शारीरिक असहनीय दर्द के साथ मानसिक अकेलापन और सामाजिक उपेक्षा मिल जाती है, तो वह किसी की भी जान ले सकती है. 

कर्नाटक के तुमकुरु जिले के ब्याठा गांव (उरडीगेरे होबली) में 19 साल की कीर्तना की जान जाने की खबर ने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है. कलाबुरगी के सलहल्लि की रहने वाली कीर्तना दो महीने पहले नौकरी की तलाश में अपने मामा के घर आई थी. काम नहीं मिलने पर वह वहीं रह रही थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि उसकी अंदरूनी जंग इतनी खामोश और खतरनाक हो सकती है. 

मृतिका के परिजनों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

मृतिका के परिजनों ने इस दुखद हादसे पर जानकारी देते हुए कहा कि कीर्तना लंबे समय से गंभीर पेट और माहवारी (Menstrual Pain) के दर्द से बेहद ही परेशान थी. यह दर्द इतना था कि वह कई बार अपने काम भी सही तरीके से नहीं कर पाती थी. जिस दिन यह हादसा हुआ, घर पर कोई मौजूद नहीं था. अकेलेपन और असहनीय तकलीफ के बीच उसने अपनी खुद की जान ले ली. यह खबर सामने आते ही फिलहाल, पूरे परिवार में मातम छाया हुआ है. 

शारीरिक दर्द और मानसिक स्वास्थ्य का है गहरा संबंध

चिकित्सा विज्ञान में इसे सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि इसके पीछे हार्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर का एक जटिल जाल होता है, जो सीधे तौर पर इंसान के जीने की इच्छा को पूरी तरह से प्रभावित कर देता है. इसके साथ ही  गंभीर मासिक धर्म दर्द (Dysmenorrhea) और PMDD (Premenstrual Dysphoric Disorder) जैसे आत्मघाती विचारों को जन्म देने की पूरी क्षमता भी रखता है. दरअसल, जब एक लड़की हर महीने ऐसे दर्द से गुजरती है जो उसे बिस्तर से उठने तक नहीं देता, तो उसके मस्तिष्क में ‘सेरोटोनिन’ जैसे खुशी देने वाले रसायनों की भारी कमी हो जाती है.

सामान्य दर्द की गलत धारणा और सामाजिक दबाव

समाज की यह धारणा कि “यह तो हर लड़की को होता है, थोड़ा बर्दाश्त करना सीखो,” पीड़ित को मानसिक रूप से और भी ज्यादा अंदर से तोड़ देती है. उसे यह लगने लगता है कि उसकी पीड़ा का कोई अंत नहीं है और कोई उसकी बात समझने वाला भी नहीं है, जिससे आत्मघाती विचार और भी ज्यादा ट्रिगर होने लगते हैं. 

चिकित्सा सहायता और सही जानकारी होना है अनिवार्य 

इस जानलेवा स्थिति से बचने के लिए सबसे पहले सावधानी और सही जानकारी होना बेहद ही महत्वपूर्ण है.  अगर पीरियड के दौरान दर्द इतना बढ़ जाए कि वह रोजमर्रा के काम को रोक दे, तो उसे ‘नॉर्मल’ कहना बंद कर देना चाहिए. यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) जैसी गंभीर बीमारियों को एक तरह से सीधा-सीधा संकेत देता है. 

तो वहीं, चिकित्सा सहायता के रूप में, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर हार्मोनल असंतुलन (Harmonal ImBalance) की जांच कराना और ज़रूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जीवन रक्षक के रूप में साबित हो सकता है. 

कैसे होनी चाहिए परिवार की भूमिका और देखभाल? 

परिवार और समाज की देखभाल इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में सा वातावरण तैयार करना होगा जहां, लड़कियां अपने दर्द को बिना किसी शर्म के बारे में आसानी से खुले मन के साथ बता सके. तो वहीं,  जब परिवार दर्द को स्वीकार करता है और समय पर डॉक्टर के पास ले जाता है, तो आधा मानसिक बोझ कम होना शुरू हो जाता है. कीर्तना का मामला दुनिया के लिए एक बेहद ही गंभीर सबक है कि पीरियड्स के दर्द को खामोशी से सहना बहादुरी नहीं, बल्कि एक चिकित्सा आपातकालीन स्थिति (Medical Emergency) की चेतावनी भी हो सकती है. 

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