झांसी से शहजाद खान की रिपोर्ट
Janmashtmi: झांसी जिला कारागार में बंद कैदियों का कैसे हृदय परिवर्तन करना है और कैसे बुराई को छुड़वाना है,उन्हें अच्छे मार्ग पर कैसे चलना है,, इन सब के लिए झांसी जिला कारागार में जन्माष्टमी कारागार उत्सव मनाया गया है।
शनिवार को जन्माष्टमी पर्व को लेकर झांसी जिला कारागार में कृष्ण कथा का आयोजन किया गया, जहां देवी मंजू लता द्वारा कृष्ण कथा का उद्बोधन किया गया, इसके अलावा उनके भक्ति गीतों पर पुरुष और महिला बंदी झूम उठे और बंदियों को बुराई से अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए साध्वी के द्वारा प्रवचन भी दिए गए हैं, कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में साध्वी देवी मंजू लता ने भगवान श्री कृष्ण के जीवन पर आधारित कथाओं का वर्णन किया, साथ ही साथ कैदियों को भजन सुनाए गए,, इसके अलावा श्री कृष्ण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जेल में बंद कैदियों ने जैसे ही इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और साध्वी के प्रवचन सुने तो वह खुशी से झूम उठे हैं।
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जन्माष्टमी के दिन व्रत खोलने के बाद क्या खाएं-
मान्यता के हिसाब से जन्माष्टमी की पूजा के दौरान खीरे के साथ श्री कृष्ण का जन्म करवाकर उनके 108 नामों का जाप करना चाहिए। जन्माष्टमी की विधि विधान से पूजा करने के बाद भगवान के भोग प्रसाद को ग्रहण करके ही अपना व्रत खोलना चाहिए। इसके बाद बाकी चीजों को ग्रहण कर सकते हैं। कोशिश करें कि व्रत खोलते वक्त भोग प्रसाद के साथ-साथ फल को ग्रहण किया जाए। इस दौरान ध्यान रहे कि आपको तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना है। साथ ही आज के दिन प्याज लहसुन से बनी कोई भी चीज नहीं खानी है।
गौरतलब है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और न्याय की विजय का प्रतीक है। कृष्ण जन्माष्टमी की कथा हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, संघर्षों के बीच उम्मीद और धर्म की पुनर्स्थापना का संदेश देती है। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 16-17अगस्त को मनाई जा रही है।
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भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हर वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और न्याय की विजय का प्रतीक है।
बता दे कि कृष्ण जन्माष्टमी की कथा हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, संघर्षों के बीच उम्मीद और धर्म की पुनर्स्थापना का संदेश देती है। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जा रही है। इस अवसर पर जन्माष्टमी की पावन कथा जो कि अधर्म पर धर्म की विजय और अंधकार में भी आशा और प्रेम की अटल शक्ति का प्रतीक है।
भविष्यवाणी कैसे हुई?
पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा में कंस नाम का एक राजा था। कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था। देवकी का विवाह वासुदेव से बड़े धूमधाम से हुआ था। एक दिन आकाश में यह भविष्यवाणी हुई कि कंस की मौत उसकी बहन की आठवीं संतान से होगी। यह सुनकर कंस बहुत डर गया। वह बहुत क्रूर था और उसने अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को जेल में बंद कर दिया। देवकी ने विनती की कि उसकी संतान अपने मामा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी, लेकिन कंस ने उसकी नहीं सुनी और देवकी के सात संतानों को मौत के घाट उतार दिया, फिर वह दिन आया कि देवकी की गोद से आखिरकार आठवीं संतान श्री कृष्ण जी ने जन्म लिया, इसकी जानकारी जैसे ही कंस को लगी तो वह उसकी हत्या करने की पूरी व्यवस्था करने लगा लेकिन उससे पहले ही वासुदेव को एक आकाशवाणी हुई कि कृष्ण को आप अपने मित्र नंद बाबा के घर गोकुल छोड़ आये। इसके बाद आकाशवाणी खत्म होते ही कारागार के सारे सैनिक सो गए और वासुदेव के हाथों में पड़ी हथकड़ियां खुल गई, इसके बाद वा सुदेव श्री कृष्ण को लेकर अपने मित्र नंद बाबा के घर गोकुल चले गए और श्री कृष्ण को वहां छोड़कर वापस कारागार आ गए।

