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छह साल बाद फिर Mohan Bhagwat से मिलने जाएंगे मौलाना मदनी! RSS की तारीफ में कही ये बात

Arshad Madani: वैसे, यह पहली बार नहीं होगा जब भागवत और मदनी की मुलाकात होगी। इससे पहले, छह साल पहले, मदनी भागवत के निमंत्रण पर उनसे मिलने आए थे।

Published by Ashish Rai

Arshad Madani RSS statement: शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों में हिंदू-मुस्लिम एकता पर आरएसएस के ज़ोर और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दोनों पक्षों के बीच ग़लतफ़हमियाँ दूर करने के अनुरोध के साथ, माहौल बदलता दिख रहा है।

देश के प्रमुख मुस्लिम समुदाय के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी की बैठक में मोहन भागवत की अपील पर विस्तार से चर्चा हुई। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इसका स्वागत किया और कहा कि इस दिशा में पहल होनी चाहिए और यह ज़मीनी स्तर पर भी दिखनी चाहिए। अगर बात हिंदुओं और मुसलमानों के एक साथ आने की है, तो वह आरएसएस के ख़िलाफ़ नहीं हैं।

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मौलाना मदनी इसी महीने आरएसएस प्रमुख से मिल सकते हैं

बैठक में मौजूद एक पदाधिकारी के अनुसार, मदनी ने ज़ोर देकर कहा कि दोनों के बीच ग़लतफ़हमियाँ दूर करने का प्रयास बयानों से आगे बढ़कर कार्रवाई तक होना चाहिए। असम सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय के घरों को तोड़े जाने जैसी घटनाओं पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ देखी गईं।

वैसे, मीटिंग में जमीयत के शीर्ष नेतृत्व ने तय किया कि मदनी के नेतृत्व में जमीयत का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही संघ प्रमुख से मिलकर इस वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक इसी महीने सितंबर में हो सकती है।

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मोहन भागवत और मौलाना मदनी की दूसरी बार होगी मुलाकात!

वैसे, यह पहली बार नहीं होगा जब भागवत और मदनी की मुलाकात होगी। इससे पहले, छह साल पहले, मदनी भागवत के निमंत्रण पर उनसे मिलने आए थे। वर्ष 2019 में यह बैठक उदासी आश्रम स्थित संघ के अस्थायी कार्यालय में हुई थी। जिसमें आपसी सौहार्द को बढ़ाने के लिए एक साथ मिलकर काम करने पर ज़ोर दिया गया था।

संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विज्ञान भवन में तीन दिवसीय संघ के 100 वर्ष-नए क्षितिज संवाद कार्यक्रम में मोहन भागवत ने हिंदू और मुसलमानों के बीच अविश्वास के माहौल को जड़ से मिटा देने की अपील की है।

जमीयत ने मौजूदा हालात पर जताई चिंता

जमीयत की कार्यकारिणी की बैठक में आरोप लगाया गया कि देश में सांप्रदायिकता, कट्टरता और अशांति बढ़ रही है। अल्पसंख्यकों और ख़ासकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ धार्मिक आधार पर भेदभाव और मदरसों व मस्जिदों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है।

ख़ासकर असम में बेदखली जारी है और पचास हज़ार से ज़्यादा मुस्लिम परिवार सिर्फ़ धार्मिक आधार पर बेघर हो गए हैं। अरशद मदनी ने असम मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की और देश के मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप करने की अपील की। ​​गाज़ा के निवासियों पर भी चिंता व्यक्त की गई।

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