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Indian Railways: खराब बेडशीट का अंत! अब ट्रेन में मिलेगा OEKO-TEX और Wool Mark सर्टिफाइड बेडरोल; किट में मिलेंगी ये चीजें

Indian Railways New Bedroll Kit : लगातार आलोचना के बाद रेलवे ने बेडरोल को लेकर बड़ा सुधार लागू किया है ताकि यात्रियों को आरामदायक और स्वच्छ अनुभव मिल सके और विवादों पर भी विराम लग सके.

By: Shubahm Srivastava | Last Updated: January 17, 2026 11:19:22 PM IST



Indian Railways Bedroll Upgrade: भारतीय रेलवे ने पहली बार रेल यात्रियों के लिए प्रीमियम क्वालिटी वाली बेडरोल किट लॉन्च की है, जिसमें ओइको टैक्स (OEKO-TEX), वूल मार्क (Wool Mark) प्रमाणन और डेट कोडिंग की सुविधा दी गई है. यह अनोखी पहल वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन से शुरू की गई है.
पिछले साल यात्रियों और नेताओं की ओर से खराब बेडरोल की शिकायतें लगातार सामने आई थीं, जिनमें राहुल गांधी ने भी मुद्दा उठाया था. लगातार आलोचना के बाद रेलवे ने बेडरोल को लेकर बड़ा सुधार लागू किया है ताकि यात्रियों को आरामदायक और स्वच्छ अनुभव मिल सके और विवादों पर भी विराम लग सके.

इंडिया न्यूज से खास बातचीत 

रेलवे के डीएमएस (डिज़ाइन और मैटीरियल स्टैंडर्ड) विभाग के अधिकारी लेनिन शर्मा ने India News से Exclusive बातचीत में बताया कि पहली बार यात्रियों के लिए फ़ैब्रिक और गुणवत्ता प्रमाणित किट दी जा रही है. बेडरोल के प्रत्येक भाग को OEKO-TEX और Wool Mark मानकों के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उपयोग की गई सामग्री त्वचा के अनुकूल, स्वास्थ्य-सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता की हो.
इतना ही नहीं, प्रत्येक आइटम पर निर्माण माह और वर्ष लिखा हुआ है, जिससे यात्री यह ट्रैक कर सकते हैं कि उसे कितने समय से इस्तेमाल किया जा रहा है. रेलवे ने इन किट्स की लाइफ दो साल निर्धारित की है और उसके बाद इन्हें अनिवार्य रूप से बदल दिया जाएगा.

रेलवे की किट में मिलेंगे 5 आइटम

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के सेकेंड एसी यात्रियों को इस किट में पाँच आइटम मिलेंगे. पहला आइटम है 100 प्रतिशत कॉटन से बनी टॉवल, जिसमें व्हाइट इंडेक्स तय है ताकि उसकी सफेदी लंबे समय तक बनी रहे और पीलापन न आए. दूसरा आइटम है वर्जिन होलो कंजूकेटेड फाइबर से भरा तकिया, जो गर्दन को आराम देता है और लंबे सफर में दर्द से बचाता है. तीसरा आइटम है एंटी स्टेन और एंटी माइक्रोबियल कोटिंग वाले पिल्लो प्रोटेक्टर जो तकिए को लार, धूल और बदबू से सुरक्षित रखते हैं. 
 
चौथा आइटम है हाई-रीच मेरिनो वूल वाले कम्बल, जिसमें ऊन की लंबी फाइबर्स और वूल कॉम्बिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे कम्बल मुलायम रहे और चुभे नहीं. पाँचवा आइटम है 65 प्रतिशत कॉटन और 35 प्रतिशत पॉलिस्टर मिश्रित बेडशीट, जिसे भी व्हाइट इंडेक्स मानकों पर तैयार किया गया है ताकि वह साफ और चमकदार दिखे.

विभिन्न फैक्ट्रियों में तैयार की जा रही ये किट

यह पूरी किट देशभर में फैली विभिन्न फैक्ट्रियों में तैयार की जा रही है. दादरा और नगर हवेली में तकिए बनाए जा रहे हैं, मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में पिल्लो कवर, गुजरात के वलसाड में बेडशीट और पंजाब के अमृतसर में कम्बल का निर्माण हो रहा है. रेलवे का मानना है कि यह बड़ा बदलाव लंबी दूरी के सफर को अधिक आरामदायक, स्वच्छ और पारदर्शी बनाएगा और यात्रियों के अनुभव को नए स्तर पर ले जाएगा.

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