Categories: देश

Chhattisgarh: बेटी की लाश सीने से लगाकर सफर करता रहा पिता, इंसानियत की मिसाल बनकर उतरे हरजीत सिंह

Chhattisgarh: बेटी की लाश सीने से लगाकर सफर करता रहा पिता, इंसानियत की मिसाल बनकर उतरे हरजीत सिंह,

Published by Swarnim Suprakash

राजनादगांव /खैरागढ़ से संवाददाता की खास रिपोर्ट 
Chhattisgarh: खैरागढ़ से निकली यह घटना किसी भी संवेदनशील दिल को झकझोरने के लिए काफी है। ग्राम मोगरा निवासी गौतम डोंगरे और उनकी पत्नी कृति अपनी रोज़ी-रोटी के लिए हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। उनकी दो वर्षीय बेटी बीमार हुई तो वे तुरंत उसे लेकर घर लौटने को निकले, लेकिन किस्मत इतनी बेरहम निकली कि हैदराबाद से चली ट्रेन में ही बच्ची ने पिता की गोद में दम तोड़ दिया। राजनांदगांव स्टेशन पर पहुंचकर गौतम ने सरकार की “मुक्तांजलि शव वाहन सेवा” से मदद मांगी, ताकि बेटी का शव गांव तक ले जाया जा सके। लेकिन जवाब मिला कि यह सुविधा सिर्फ तब मिलती है जब मौत सरकारी अस्पताल में दर्ज हो। सरकारी इंतजाम से मायूस पिता ने अपनी मासूम बेटी की लाश को सीने से चिपकाए, साधारण बस से खैरागढ़ तक का सफर किया। यह सफर महज दूरी का नहीं था, बल्कि टूटी उम्मीदों, बेबसी और आंसुओं का सफर था।

Noida: नोएडा से दिल्ली तक साइकिल यात्रा निकालने पहुंचे सपा कार्यकर्ता, पुलिस ने किया डिटेन

बेटी की मौत के बाद भी गांववाले शोक बांटने तक नहीं आए

खैरागढ़ बस स्टैंड पर जब बस रुकी तो परिवार पूरी तरह अकेला था। न गांव का कोई साथ था, न रिश्तेदारों का सहारा। उसी वक्त आगे आए समाजसेवी हरजीत सिंह। उन्होंने बिना किसी दिखावे और बिना किसी स्वार्थ के इंसानियत का हाथ बढ़ाया। हरजीत सिंह ने न सिर्फ परिवार को घर तक पहुंचाया बल्कि अंतिम संस्कार की हर प्रक्रिया में साथ खड़े रहे। हरजीत सिंह ने कहा – “उस पल मैंने सिर्फ इतना सोचा कि यह बच्ची मेरी भी बेटी हो सकती थी। इंसानियत के नाते उनका हाथ थामना मेरा फर्ज था। दुख में साथ देना ही असली समाज और असली धर्म है।” गांव ने प्रेम विवाह करने वाले इस दंपत्ति का बहिष्कार कर रखा था। बेटी की मौत के बाद भी गांववाले शोक बांटने तक नहीं आए। ऐसे समय में, जब समाज चुप रहा, तब हरजीत सिंह ने साबित किया कि इंसानियत किसी जाति, बिरादरी या रिवाज से बड़ी होती है।

Mumbai Crime: सरकारी कोटे में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगे लाखों रुपए , पुलिस ने किया गिरफ्तार

इंसानियत आज भी जिंदा है

एक ओर सरकार के खोखले वादे पिता को मजबूर कर देते हैं कि वह अपनी बेटी की लाश बस में ढोए, वहीं दूसरी ओर समाज भी जातीय जंजीरों में जकड़ा हुआ है जो दर्द में भी सहारा नहीं देता। लेकिन इस अंधेरे में भी हरजीत जैसे लोग उम्मीद की लौ बनकर सामने आते हैं। यह कहानी सिर्फ एक मासूम की मौत की नहीं, बल्कि यह याद दिलाती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है, बस जरूरत है कि हम उसे पहचानें और जीएं।

Mumbai Floods: पानी-पानी हुई मायानगरी, मुंबई में भारी बारिश के चलते बाढ़ जैसे हालात, खतरे में दिल्ली-NCR

Swarnim Suprakash
Published by Swarnim Suprakash

Recent Posts

Silver Price Today: US-Iran संकट के बीच चांदी ने पकड़ी रफ्तार, MCX पर कीमतों में बड़ा जंप

Silver Rate Today: शुक्रवार, 6 मार्च को चांदी की कीमतों में तेज़ी आई क्योंकि इन्वेस्टर्स…

March 6, 2026

India vs England: 2 साल बाद सूर्या की तरह अक्षर ने कैसे लिखी जीत की कहानी, देखें वीडियो

India vs England: टी20 विश्व कप 2026 सेमीफाइनल में अक्षर पटेल ने शानदार फील्डिंग, तीन…

March 6, 2026

Mojtaba Khamenei: औलाद पैदा नहीं कर सकते थे मोजतबा खामेनेई! कर रखीं थीं कई शादियां, नए सुप्रीम लीडर को लेकर खुले बड़े राज़

Iran-Israel War: US डिप्लोमैट द्वारा लीक की गई जानकारी में कहा गया कि, मोजतबा खामेनेई…

March 6, 2026

India-US Relations: जंग के बीच भारत को बड़ी राहत! अमेरिका ने दे दी छूट; अब इस देश से आएगा तेल

Russian Oil: इजराइल ईरान के बीच चल रही वॉर के कारण लगातार अन्य देशों को…

March 6, 2026

Fighter Jet Crash: पहले रडार से गायब, फिर मिला मलबा! भारतीय वायुसेना का सुखोई फाइटर जेट क्रैश

Fighter Jet Crash: इंडियन एयर फ़ोर्स की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान के…

March 6, 2026