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BMC Election: मुंबई के विकास के लिए बीएमसी चुनाव अहम, MVA गठबंधन से किस बात का डर, महायुती क्यों आगे?

BMC Election 2026: महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव के लिए 15 जनवरी को वोटिंग होगी, उससे पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. साथ ही महायुती और एमवीए सरकार के कामों की भी तुलना हो रही है. इसमें दावा किया जा रहा है कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में मुंबई में विकास के कई बड़े काम हुए हैं.

By: Hasnain Alam | Last Updated: January 8, 2026 3:19:10 PM IST



BMC Election 2026: महाराष्ट्र में बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिका चुनावों के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है, जबकि 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे. इससे पहले इन दिनों राज्य में सियासत गरमाई हुई है. इस समय महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति की सरकार है, जिसमें बीजेपी के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल है.

महायुति सरकार को लेकर दावा किया जाता है कि मुंबई में तेजी से विकास हुआ है, जो एमवीए यानी महा विकास अघाड़ी की सरकार के दौरान नहीं हुआ. एमवीए में कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी पार्टी शामिल थी. कहा जाता है कि एमवीए के सरकार के दौरान मुंबई के विकास की गति धीमी पड़ गई थी.

देवेंद्र फडणवीस की सरकार में इन बड़े प्रोजेक्ट पर काम हुए शुरू

इस दावे के पीछे कई वजहें भी हैं. देवेंद्र फडणवीस जब पहली बार साल 2014 से 2019 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री थे, तो उनके नेतृत्व में मुंबई मेट्रो नेटवर्क, कोस्टल रोड और ट्रांस हार्बर लिंक (अटल सेतु) जैसे बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे.

वहीं अगर बात करें उद्धव ठाकरे के शासन काल की, तो विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगाने का आरोप लगता है. गौरतलब है कि साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने चौंकाते हुए बीजेपी से गठबंधन तोड़ कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाकर सरकार बनाई थी. तब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने थे.

एमवीए की सरकार पर मेट्रो-3 का काम रोकने का भी आरोप 

आरोप है कि एमवीए की सरकार में देवेंद्र फडणवीस से श्रेय छीनने की भावना के तहत मेट्रो-3 का आरे कारशेड रोक दिया गया और इस एक फैसले से प्रोजेक्ट का खर्च 10,000 करोड़ रुपये बढ़ गया. साथ ही इस प्रोजेक्ट के पूरा होने में चार साल की देरी हुई.

यही नहीं यह भी कहा जाता है कि जलसंरक्षित क्षेत्र से लेकर मेट्रो तक, हर लोक-कल्याणकारी काम को उद्धव ठाकरे की सरकार ने रोका और काम में बाधा डालने वाले आदेश जारी होते रहे. इस बीच कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने चुनौतियों को और बढ़ा दिया. इसी अवधि में खिचड़ी से लेकर बॉडी बैग तक के बड़े घोटालों के आरोप भी लगे.

मुंबई में रुके प्रोजेक्ट्स के फिर से कैसे शुरू हुए काम?

इसके बाद साल 2022 में शिवसेना के ही एकनाथ शिंदे ने पार्टी में बगावत कर दी और अपने साथ 35 से ज्यादा विधायकों को मिलाकर बीजेपी के साथ सरकार बनाई. एकनाथ शिंदे खुद मुख्यमंत्री बने. कुछ समय बाद शरद पवार की एनसीपी भी टूट गई. अजीत पवार अलग होकर एकनाथ शिंदे और बीजेपी से हाथ मिलाते हुए सरकार में शामिल हो गए. 

ऐसे में महायुती की सरकार बनने के बाद साल 2014 से 2019 के दौरान जिन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हुए थे, जिनपर एमवीए की सरकार में ब्रेक लगे, वे फिर से शुरू किया गया. इनमें कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स इस प्रकार हैं.

अटल सेतु

देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में मुंबई के लोगों को अटल सेतु के रूप में एक बड़ी सौगात मिली. अटल सेतु, जिसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL) भी कहते हैं, यह देश का सबसे लंबा समुद्री पुल है, जिसे महायुति सरकार में रिकॉर्ड समय में पूरा कर जनता के लिए खोला गया.

कोस्टल रोड

महायुति सरकार के इस प्रोजेक्ट से ही दक्षिण मुंबई-वर्ली का सफर कुछ ही मिनटों में तय हो रहा है.

मेट्रो और बुलेट ट्रेन

वहीं जिस बुलेट ट्रेन को कभी अवांछित परियोजना कहकर आलोचना का सामना करना पड़ा था, उस पर आज युद्धस्तर पर काम चल रहा है. इसके साथ ही मुंबई में मेट्रो के नए मार्ग भी निरंतर जुड़ रहे हैं, जो शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को गति दे रहे हैं.

इन सबके बीच 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुती को बड़ा जीत मिली और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने. ऐसे में लोगों का कहना है कि अब मुंबई में विकास की गति तेज ही रहेगी.

MVA से किस बात का डर?

वहीं कुछ लोगों को इस बात का भी डर है कि अगर मुंबई महानगरपालिका में एमवीए को मौका मिल गया, तो मुंबई का विकास निश्चित रूप से थम सकता है. फिर से प्रोजेक्ट स्थिगत होने लगेंगे. अब देखना ये होगा कि बीएमसी चुनाव में जनता किसे चुनती है.

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