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‘नेहरू जी ने देश के राष्ट्रपति को सोमनाथ मंदिर जाने नहीं दिया’ भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए कई गंभीर आरोप

BJP Spokesperson Sudhanshu Trivedi: इंडिया न्यूज को दिए इंटरव्यू में भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि नेहरू जी को ताजमहल में जाने के बाद ताजगी महसूस होती है. जबकि मंदिरों में जाने के बाद डिप्रेसड फील करता हूं.

By: Sohail Rahman | Published: January 11, 2026 11:06:14 PM IST



Sudhanshu Trivedi Interview: इंडिया न्यूज को दिए इंटरव्यू में भाजपा के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. इस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. इस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि सेक्युलर नेशन होने के कारण नेहरू जी ने देश के राष्ट्रपति को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में जाने पर आपत्ति जताई थी, तो उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि एन.वी गाडगिल नेहरू सरकार में कैबिनेट मंत्री थे.

उन्होंने ‘Government From Inside’ नाम की किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने साफ-साफ लिखा है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री होने के नाते मैंने नेहरू के कहने पर अनेक मस्जिदों और दरगाहों की मरम्मत सरकारी खर्चे से करवाई.

नेहरू और कांग्रेस पर लगाए कई गंभीर आरोप (Several serious allegations were made against Nehru and the Congress party)

उन्होंने इस इंटरव्यू के दौरान आगे कहा कि दरअसल, नेहरू जी और कांग्रेस के लोगों ने भारत के संविधान को पार्शियली मुस्लिम कॉन्स्टिट्यूशन बना दिया. पाकिस्तान और बांग्लादेश मुस्लिम देश बने, लेकिन भारत को संविधान के मुताबिक आंशिक मुस्लिम देश बना दिया गया, जिसे अब असलियत में सच्चा धर्मनिरपेक्ष देश बनाया जा रहा है.



नेहरू जी का विरोध मंदिरों से था: भाजपा प्रवक्ता (Nehru was opposed to temples: BJP spokesperson)

नेहरू जी का विरोध मंदिरों से था. 17 मार्च 1959 को वे ललित कला अकादमी में एक भाषण देते हैं, जिसमें वे कहते हैं कि जब मैं दक्षिण भारत के मंदिरों में जाता हूं तो मेरी स्पिरिट डिप्रेस्ड महसूस करती है. मैं समझ नहीं पाता कि मेरी स्पिरिट डिप्रेस क्यों हो जाती है. लेकिन वहीं, जब मैं ताजमहल के सामने खड़ा होता हूं, तो मुझे बड़ी ताजगी महसूस होती है.

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सोमनाथ से लेकर बाबरी तक ये सब हिंदू मंदिरों के विरोध में थे और शरिया, पर्सनल लॉ बोर्ड और मदरसा के पक्ष में थे. तो वे सेक्युलर नहीं थे, इसे सूडो-सेक्युलरिज्म या छद्म धर्म निरपेक्षता कहते हैं. इसलिए मैं कहता हूं कि भारत में सेक्युलरिज्म खतरे में नहीं है, बल्कि सूडो-सेक्युलरिज्म के कारण भारत खतरे में है.

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