Bihar Politics: कौन हैं ‘थारू’ जिन पर है नीतीश कुमार की नजर, मिला समर्थन तो बिहार में NDA की सरकार बनना तय!

Bihar politics: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने जातीय समीकरणों को साधने में जुट गयी है। इसी कड़ी में बगहा में थारू समाज को खुश करने की कोशिश में नीतीश सरकार जुट गयी है आपको बता दें कि बगहा में थारू समाज को खुश करने की ज़िम्मेदारी तीन थारू नेताओं को दी गई है।जिन्हे चुनाव से ठीक पहले  थारू आदिवासियों को राज्य में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है।

Published by Shivani Singh

Bihar politics: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने जातीय समीकरणों को साधने में जुट गयी है। इसी कड़ी में बगहा में थारू समाज को खुश करने की कोशिश में नीतीश सरकार जुट गयी है आपको बता दें कि बगहा में थारू समाज को खुश करने की ज़िम्मेदारी तीन थारू नेताओं को दी गई है। जिन्हे चुनाव से ठीक पहले  थारू आदिवासियों को राज्य में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है।

आपको  बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार वर्षों पुराना वादा पूरा किया है। पिछले वर्षों में जब भी लगभग 65,000 मतदाताओं ने प्रतिनिधित्व की दावेदारी पेश की, उन्हें आश्वासन देकर शांत करने की कोशिश की गई। लेकिन अब 65000 थारू मतदातों को अपने  नेतृत्वकर्ता मिला है।  

यह अलग बात है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में समाज के नामचीन चेहरों ने थारूओं को खुश करने की कोशिश की, लेकिन सुशासन के भरोसे के आगे उनकी एक न चली। इस बीच, थारू समाज की जड़ें मज़बूत होती गईं। अब अगर आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी दावेदारी को नज़रअंदाज़ करने से वोटों का समीकरण बिगड़ सकता है, तो राजनीतिक जानकार भला कैसे पीछे रह सकते थे।

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तीन थारू नेताओं को दी गई ज़िम्मेदारी

आपको बता दें कि हाल ही में, लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके प्रमुख थारू नेता शैलेंद्र गढ़वाल को अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। थारू समुदाय ने इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त किया और विकास की उम्मीद जताई। इसके साथ ही, आदिवासी समुदाय से आने वाले सुरेंद्र उरांव को उपाध्यक्ष बनाया गया। वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के दो समुदायों के प्रमुख नेताओं को ये पद दिए जाने के बाद, यह चर्चा तेज़ हो गई कि शायद इस बार भी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में किसी तरह का जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है। विकास के दावों के बीच वोट मांग रहे एनडीए गठबंधन ने प्रेमशीला को आयोग का सदस्य बनाया।

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गंडक के दोनों किनारों पर बसे हैं वाल्मीकिनगर के मतदाता

मालूम हो कि बिहार का वाल्मीकिनगर गंडक नदी के दोनों किनारों पर स्थित है। जिसमें पिपरासी, मधुबनी, ठकराहा और भितहा प्रखंड के साथ-साथ बगहा 2 प्रखंड के वाल्मिकीनगर, महुवा, कटहरवा, हरनाटांड़, रमपुरवा, संतपुर, लक्ष्मीपुर, गोनौली, नौरंगिया दरदरी, सोहरिया, चंपापुर,बलुआ, छत्रौल, देवरिया, तरूअनवा भड़ची, बेलहवा, मदनपुर, बकुली पंचगावा, विनवलिया बोधसर, बोरवल, नया गांव, रामपुर, मंगलपुर औसानी इस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नरवल, समेमरा, कटकुइया, यमुनापुर तड़वलिया, जिमरी नौतनवा और ढोलबजवा लक्ष्मीपुर गांव हैं। बगहा 2 प्रखंड में अधिकतर थारू और आदिवासी लोग रहते हैं.

धीरेंद्र प्रताप ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी

आपको बता दें कि वाल्मिकीनगर से जेडीयू विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ ​​रिंकू सिंह थारू समुदाय में काफी लोकप्रिय हैं. वह 2015 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद वह जदयू में शामिल हो गए थे। मालूम हो कि पिछला चुनाव उन्होंने जदयू के टिकट पर लड़ा था और विजयी हुए थे। इस बार भी उन्हें चुनाव में उतारने की पूरी तैयारी है। लेकिन अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। वहीँ विधायक का कहना है कि मुख्यमंत्री ने थारू समाज के लिए विकास के काफी कार्य किए हैं।

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