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BMI! जिसे आप ‘फिटनेस’ समझ रहे थे, वो धोखा है? आप मोटे हैं या नहीं, पता करने के लिए अपनाएं ये नया फॉर्मूला

क्या BMI आपको अपनी सेहत के बारे में गुमराह कर रहा है? नई स्टडी ने मोटापे को मापने का एक ज़्यादा सटीक तरीका बताया है। जानें वो कौन सा एक आंकड़ा है जो BMI से बेहतर है...

By: Shivani Singh | Published: January 8, 2026 5:25:41 PM IST



बदलते लाइफस्टाइल और खाने-पीने की आदतों के बीच मोटापा एक ग्लोबल महामारी की तरह फैल रहा है और यह इतना आम हो गया है कि इससे लड़ने के लिए दवाएं भी बनाई गई हैं. अब तक लोग अपने वज़न की स्थिति जानने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (BMI) पर निर्भर रहते थे, लेकिन ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ ओबेसिटी’ में पब्लिश एक हालिया स्टडी ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है.

वैज्ञानिकों का दावा है कि स्वास्थ्य और मोटापे के जोखिम को मापने के लिए BMI के मुकाबले कमर-से-ऊंचाई का अनुपात (WHtR) ज़्यादा सटीक और भरोसेमंद तरीका है. यह तरीका उम्र के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को समझने में भी मदद कर सकता है. आइए इस तरीके के बारे में और जानें और यह भी जानें कि वैज्ञानिक BMI को कम भरोसेमंद क्यों मानते हैं.

नई स्टडी क्या कहती है?

शेफ़ील्ड यूनिवर्सिटी और नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स द्वारा की गई एक स्टडी में, उन्होंने 2005 और 2021 के बीच इंग्लैंड के हेल्थ सर्वे के डेटा का इस्तेमाल करके 11 से 89 साल की उम्र के 120,000 से ज़्यादा लोगों के डेटा की जांच की. उनकी रिसर्च में पाया गया कि कमर-से-ऊंचाई का अनुपात (WHtR) बढ़ती उम्र के साथ मोटापे के जोखिम को बेहतर ढंग से दिखाता है.

वे कहते हैं कि BMI सिर्फ़ वज़न और ऊंचाई का आकलन करता है और यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहाँ जमा हो रहा है. दूसरी ओर, कमर-से-ऊंचाई का अनुपात सीधे पेट के आसपास के फैट को मापता है, जिसे सबसे खतरनाक तरह का फैट माना जाता है.

उम्र के साथ यह अनुपात ज़्यादा महत्वपूर्ण क्यों हो जाता है?

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर में, खासकर पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है. यह पेट का मोटापा दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज़ का एक बड़ा कारण है. स्टडी के अनुसार, कमर-से-ऊंचाई का अनुपात इन बीमारियों के जोखिम को पहले पहचानने में मदद कर सकता है, जिससे समय पर लाइफस्टाइल में बदलाव किए जा सकें.

कमर-से-ऊंचाई का अनुपात क्या है?

कमर-से-ऊंचाई का अनुपात कैलकुलेट करना बहुत आसान है. बस अपनी कमर का साइज़ (cm में) अपनी ऊंचाई (cm में) से डिवाइड करें. उदाहरण के लिए, अगर किसी की कमर का साइज़ 100 cm है ​​और ऊंचाई 170 cm है, तो 100 को 170 से डिवाइड करने पर 0.588 आता है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर यह आंकड़ा 0.5 से ज़्यादा है, तो इसे स्वास्थ्य के लिए चेतावनी का संकेत माना जाता है. इसका मतलब है कि आपकी कमर का साइज़ आपकी ऊंचाई के आधे से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

अपनी कमर का साइज़ बढ़ने से रोकने के लिए क्या करें?

अगर आपकी कमर और हाइट का रेशियो 0.5 से ज़्यादा है, तो चिंता करने की ज़रूरत नहीं है; आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे कम कर सकते हैं। अपनी कमर का साइज़ कम करने के लिए, आपको कैलोरी कम लेनी होगी. इसके लिए, बैलेंस्ड डाइट लें, हर दिन कम से कम 30 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें, प्रोसेस्ड फूड और चीनी से बचें, प्रोटीन ज़्यादा लें, स्ट्रेस मैनेज करें और पूरी नींद लें। ये छोटे-छोटे बदलाव पेट की चर्बी कम करने में मदद कर सकते हैं.

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