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सिगरेट छोड़िए, आपकी अगरबत्ती भी है कैंसर का कारण? रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

क्या रोज जलने वाली अगरबत्ती आपके घर की हवा को शुद्ध कर रही है या फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है? जानिए धूप-अगरबत्ती के धुएं से बढ़ता एलर्जी, अस्थमा और कैंसर का खतरा.

Published by Shivani Singh

क्या आपने कभी सोचा है कि जो अगरबत्ती आप रोज़ घर में जलाते हैं वो सच में घर की हवा को शुद्ध कर रही है, या धीरे-धीरे उसे ज़हरीला बना रही है? पूजा, शांति और सकारात्मक माहौल के नाम पर हम अपने घरों में रोज़ धूप और अगरबत्ती जलाते हैं. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वैज्ञानिक शोध बता रहे हैं कि इसका धुआं सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है. हाँ, आपने सही पढ़ा वही अगरबत्ती जिसकी खुशबू आपको शांत करती है, वही आपके फेफड़ों पर धीमा ज़हर बनकर असर डाल सकती है. चलिए, इस सच को गहराई से समझते हैं क्योंकि ये जानकारी आपकी सोच पूरी तरह बदल सकती है.

दरअसल, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (NIH) की रिसर्च के मुताबिक, घर में रोज़ाना धूप और अगरबत्ती जलाने से हमारी सेहत को नुकसान होता है. इन धूप और अगरबत्ती से निकलने वाला धुआं धीरे-धीरे फेफड़ों की बीमारी का कारण बनता है. धूप और अगरबत्ती का धुआं हमारी सेहत के लिए सिगरेट के धुएं से भी ज़्यादा खतरनाक है.

धूप और अगरबत्ती का धुआं खतरनाक क्यों है?

विशेषज्ञों के मुताबिक “अगरबत्ती जलाने से PM 2.5 और PM 10 जैसे छोटे पार्टिकल और केमिकल (VOCs) निकलते हैं, जो सिगरेट के धुएं जितना ही नुकसान पहुंचा सकते हैं.” इन पार्टिकल्स में निकोटीन भी हो सकता है, जिससे सेहत पर असर पड़ सकता है. अगर घर में ठीक से हवा नहीं आती है, तो ये धुएं फेफड़ों में जमा हो सकते हैं, जिससे सूजन, एलर्जी और सांस की दिक्कतें हो सकती हैं.

ताइवान और हांगकांग में हुई रिसर्च से पता चलता है कि अगरबत्ती जलाने से घर के अंदर PM 2.5 का लेवल सुरक्षित लिमिट से ज़्यादा हो सकता है, जिसका मतलब है कि वे हवा में नुकसानदायक लेवल पर निकलते हैं. बंद कमरे में रोज़ाना अगरबत्ती जलाने से हवा में नुकसानदायक पार्टिकल्स बढ़कर फेफड़ों और सेहत के लिए खतरा बढ़ सकता है.

अगरबत्ती के धुएं के लंबे समय तक चलने वाले खतरे

डॉ. मित्तल ने कहा, “रोज़ाना अगरबत्ती जलाने से अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 2020 की एक स्टडी में पाया गया कि रोज़ाना अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में आने से स्कूली बच्चों के फेफड़ों की क्षमता (FEV1 और FVC) कम हो गई.”

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इसका मतलब है कि बच्चों के फेफड़े ठीक से हवा अंदर और बाहर नहीं ले पा रहे थे. 2020 में एशियाई आबादी पर हुई एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग रोज़ाना लंबे समय तक अगरबत्ती जलाते हैं, उन्हें फेफड़ों के कैंसर का खतरा थोड़ा ज़्यादा होता है. यह खतरा उन लोगों में ज़्यादा था जो पहले से स्मोकिंग करते थे या दूसरी मेडिकल कंडीशन से परेशान थे.

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रोज़ाना और कभी-कभी इस्तेमाल करने में क्या अंतर है?

कभी-कभी अगरबत्ती जलाना, जैसे महीने में 2-3 बार, अच्छी हवादार जगहों पर, आम तौर पर कम खतरनाक होता है. बंद कमरे में रोज़ाना अगरबत्ती जलाना खतरनाक हो सकता है और फेफड़ों की क्षमता कम कर सकता है.  इससे सांस की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं और लंबे समय तक चलने वाला नुकसान हो सकता है. 

इन आसान तरीकों से इस्तेमाल करने से बचें:

  • पूजा करते समय या अगरबत्ती जलाते समय खिड़कियां और दरवाज़े खुले रखें ताकि धुआं निकल सके.
  • रोज़ अगरबत्ती जलाने की आदत छोड़ें; इसे सिर्फ़ खास मौकों पर ही जलाएं.
  • अपने घर को फ्रेश रखने के लिए नेचुरल तरीकों का इस्तेमाल करें, जैसे फूलों की खुशबू या एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना.
  • छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों के कमरों में अगरबत्ती या धूप न जलाएं.

धूप और अगरबत्ती हमारी परंपरा का हिस्सा हैं, लेकिन इनका धुआं धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए, इनका इस्तेमाल समझदारी से और ज़रूरत के हिसाब से लिमिट में करना चाहिए. इसलिए, धूप और अगरबत्ती हमेशा घर की खुली या हवादार जगह पर जलानी चाहिए, ताकि धुआं जमा न हो.

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Shivani Singh
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