Chest Infection : मौसम बदलने के साथ ही छाती में संक्रमण के मामले बढ़ने लगते हैं. इसका खतरा सबसे ज्यादा बुजुर्गों में बढ़ जाता है. छाती में संक्रमण की समस्या वृद्धावस्था में गंभीर खतरा बन सकती है. चिकित्सकों का कहना हैं कि बुजुर्गों को इस बीमारी को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. उम्रदराज लोगों में छाती के संक्रमण तेजी से जानलेवा रूप ले सकता है.
क्या है छाती का संक्रमण?
छाती का संक्रमण फेफड़ों और सांस की नलियों में होने वाला इंफेक्शन है, जिसे मेडिकल भाषा में लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन कहा जाता है. यह आमतौर पर ब्रोंकाइटिस या निमोनिया के रूप में सामने आता है. संक्रमण बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है और इसकी शुरुआत सामान्य खांसी, जुकाम या बुखार से हो सकती है, लेकिन समय रहते इलाज न मिले तो यह फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
वृद्धावस्था में क्यों ज्यादा खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है. इसके साथ ही फेफड़ों की कार्यक्षमता भी कम होने लगती है. डायबिटीज, हार्ट डिजीज, हाई बीपी, अस्थमा या सीओपीडी जैसी पहले से मौजूद बीमारियां खतरे को और बढ़ा देती हैं. ऐसे में मामूली दिखने वाला छाती का संक्रमण भी बुज़ुर्गों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
- लगातार खांसी और गाढ़ा पीला या हरा बलगम
- सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न
- बुखार, ठंड लगना या अत्यधिक पसीना
- ऑक्सीजन लेवल का गिरना
- अचानक कमजोरी, सुस्ती या भ्रम
- बुज़ुर्गों में कई बार तेज बुखार नहीं होता, बल्कि अचानक कमजोरी ही गंभीर संक्रमण का संकेत होती है
इलाज न हो तो जान पर बन सकती है
यदि छाती के संक्रमण का समय पर इलाज न किया जाए तो यह निमोनिया, ऑक्सीजन की भारी कमी, सेप्सिस और लंबे समय तक आईसीयू में भर्ती जैसी स्थितियों तक पहुंचा सकता है. कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है. डॉक्टरों का कहना है कि इलाज में देरी बुज़ुर्गों के लिए सबसे बड़ा खतरा है.
इलाज और जोखिम
डॉक्टरों के अनुसार उम्र, धूम्रपान, प्रदूषण, कमजोर इम्यून सिस्टम और पुरानी बीमारियां छाती के संक्रमण के प्रमुख जोखिम कारक हैं. इलाज संक्रमण के कारण पर निर्भर करता है. बैक्टीरियल संक्रमण में एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं, जबकि गंभीर मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट और अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ती है.
यह उपाय ही सबसे बड़ा बचाव
डॉक्टर सलाह देते हैं कि बुज़ुर्गों को फ्लू और न्यूमोकोकल वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए. ठंड में शरीर को ढककर रखना, धूम्रपान और प्रदूषण से बचना, घर में हीटर का सीमित उपयोग, पर्याप्त पानी पीना और खांसी-जुकाम को हल्के में न लेना बेहद जरूरी है.
शरद पवार छाती में संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती
बता दें हाल ही में वरिष्ठ नेता शरद पवार को छाती के संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जिसके बाद इस बीमारी को लेकर डॉक्टरों की चेतावनी सामने आई है. शरद पवार के अस्पताल में भर्ती होने का मामला साफ संकेत देता है कि बुज़ुर्गों में छाती का संक्रमण छोटी बीमारी नहीं है. समय रहते डॉक्टरों की निगरानी और इलाज से स्थिति को काबू में रखा जा सकता है. सावधानी, समय पर जांच और इलाज ही इस साइलेंट किलर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है.

