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Elderly Doctor Rescue: ऑस्ट्रेलिया में परिवार, घर में अकेले पिता…दिल दहला देगा बुज़ुर्ग डॉक्टर के रेस्क्यू का वीडियो

Haryana News: अपना आशियाना ऑर्गनाइज़ेशन के मेंबर राज कुमार अरोड़ा ने कहा कि हालाँकि वह आदमी एक अच्छे-खासे परिवार से था, लेकिन समय के साथ उसकी हालत काफी खराब हो गई थी.

Published by Shubahm Srivastava

Elderly Doctor Rescue Haryana: हरियाणा से एक परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक बुज़ुर्ग आदमी को एक सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन ने उसके घर से बचाया, जहाँ वह महीनों से बहुत खराब और बिगड़ती हालत में अकेला रह रहा था. इस रेस्क्यू का एक वीडियो ऑनलाइन सामने आया है और इसने कई लोगों को हैरान कर दिया है. यूज़र्स सवाल कर रहे हैं कि इतने लंबे समय तक ऐसी हालत पर ध्यान कैसे नहीं गया.

करनाल में घर से बुज़ुर्ग डॉक्टर को बचाया गया

ट्रिब्यून इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक लोकल सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन ने एक बुज़ुर्ग होम्योपैथिक डॉक्टर को बचाया, जो मीरा घाटी चौक के पास अपने घर पर बहुत खराब हालत में अकेले रह रहे थे. अपना आशियाना ऑर्गनाइज़ेशन के मेंबर राज कुमार अरोड़ा ने कहा कि हालाँकि वह आदमी एक अच्छे-खासे परिवार से था, लेकिन समय के साथ उसकी हालत काफी खराब हो गई थी.

ऑस्ट्रेलिया में रहता है परिवार

जब ऑर्गनाइज़ेशन ने उसकी पत्नी से कॉन्टैक्ट किया, जो अपनी दो बेटियों के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहती है, तो उसने कथित तौर पर उन्हें बताया कि उसके पति की मेंटली स्टेबल हालत ठीक नहीं है और उसने आइसोलेशन में रहने का फैसला किया है. उसने उन्हें यह भी बताया कि सेक्टर 7 में उनके घर पर उनकी देखभाल के लिए एक अटेंडेंट रखा गया है. लेकिन कहा जाता है कि उसने वहाँ रहने से मना कर दिया और मीरा घाटी चौक के पास अपने घर में अलग रहने पर ज़ोर दिया.

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डेढ़ साल से अपने कपड़े नहीं बदले

वायरल वीडियो में ऑर्गनाइज़ेशन के मेंबर बुज़ुर्ग आदमी को घर से बाहर ले जाते हुए दिख रहे हैं, जबकि पड़ोसी अपनी छतों से देख रहे हैं. वीडियो में दी गई डिटेल्स के मुताबिक, उस आदमी ने लगभग डेढ़ साल से अपने कपड़े नहीं बदले थे. उसके कपड़ों और शरीर से तेज़ बदबू आ रही थी और घर की हालत बहुत गंदी और नज़रअंदाज़ की हुई बताई गई थी.

इंटरनेट पर आ रहीं प्रतिक्रिया

कई यूज़र्स ने इस स्थिति पर दुख और गुस्सा ज़ाहिर किया, एक यूज़र ने कमेंट किया, “माता-पिता से बड़ी कोई दौलत नहीं है. जान बचाने से लेकर करनाल में अपने ही घर में भुला दिए जाने तक — यह सिर्फ़ नज़रअंदाज़ नहीं है, यह एक नैतिक नाकामी है. विदेश में मिली सफलता का कोई मतलब नहीं है अगर वह घर की इज़्ज़त छोड़ दे. एक समाज का अंदाज़ा इस बात से लगाया जाता है कि वह अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा बर्ताव करता है. बचाने के लिए धन्यवाद.”

एक और ने कहा, “क्या तथाकथित बेटे और बेटी को पता नहीं था कि उनके बुज़ुर्ग पिता घर पर अकेले हैं?” किसी और ने सवाल किया, “ऑस्ट्रेलिया में रहने का क्या मतलब है? अगर आप अपने माता-पिता का ही ख्याल नहीं रख सकते.”

Shubahm Srivastava

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