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Humla Nyinba Community: नेपाल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी परंपराओं के लिए जाना जाता है. इन्हीं परंपराओं में से एक पांचाली प्रथा है, जिसे ‘भ्रातृ बहुपतित्व’ के नाम से भी जाना जाता है. महाभारत की द्रौपदी की याद दिलाने वाली ये परंपरा नेपाल के सुदूर हुमला में आज भी जिंदा है. यहां न्यिनबा समुदाय के लोग एक ही महिला से सभी भाइयों के शादी कराते हैं. यह सुनने में काफी अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे के कारण आर्थिक और सामाजिक कार्यों के जुड़ी हुई है.
पहाड़ियों में बसा ‘न्यिनबा’ समुदाय
नेपाल के हुमला जिले की पहाड़ियों में ‘न्यिनबा’ समुदाय बसा हुआ है. यह लोग मुख्य रूप से चार गांव में रहते हैं. जिन्हें स्थानिय भाषा नें ‘न्यिन युल त्शान जी’ (धूप वाली ढलान पर बसे चार गांव) कहा जाता है. समुद्र तल से 2,550 से 3,300 मीटर की ऊंचाई पर बसा ये गांव करनाली और दोजाम नदियों से घिरा है. यहां जिवन यापन और खेती करना काफी मुश्किल है. इसी चुनौतीपूर्ण वातावरण ने इस समुदाय को एक ऐसी परंपरा अपनाने को मजबूर कर दिया, जो आज पूरी दुनिया के लिए हैरान कर देने जैसा है.
क्यों निभाई जाती है ये परंपरा?
इस प्रथा के पीछे का सबसे बड़ा कारण आर्थिक है. इस समुदाय के मुताबिक, यदि घर का भाई अलग-अलग शादी करता है, तो परिवार की संपत्ति का बंटवारा करना होगा. जिससे जमीन के टूकड़े हो जाएंगे और परिवार गरीबी में फंसता चला जाएगा. आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सभी भाइयों की शादी एक ही लड़की से कर दी जाती है.
कैसे होती है शादी की प्रक्रिया?
इस व्यवस्था में शादी की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपारिक होती है. लड़की की शादी मुख्य तौर पर परिवार के सबसे बड़े भाई से कराई जाती है. शादी के बाद वह महिला सभी भाइयों की पत्नी मानी जाती है. घर का मुखिया बड़ा भाई होता है और उसी के फैसले सभी को मानने होते हैं. सभी भाइयों को समान अधिकार दिए गए हैं. यहां तक की बच्चे की जिम्मेदारी भी किसी एक की नहीं होती, बल्कि पूरा परिवार सामूहिक रूप से बच्चे की जिम्मेदारी उठाता है.
बच्चों का भविष्य
इस प्रथा में किसी तरह का विवाद पैदा नहीं होता है. क्योंकि बच्चे की जिम्मेदारी एक भाई नहीं, बल्कि पूरा परिवार मिलकर उठाता है. न्यिनबा समुदाय में बच्चे एक सामूहिक जिम्मेदारी के प्रतीक माने जाते हैं. संपत्ति में भी उनका हिस्सा संयुक्त रहता है, जिससे विवाद की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म हो जाती है. महिलाएं घर और खेती का काम संभालती हैं. पुरुष व्यापार और पशुपालन से जुड़े काम करते हैं.
परंपरा और कानून
नेपाल सरकार ने 1963 में इस प्रथा का कानूनी तौर पर रोक लगा दी थी. इसके बावजूद आधुनिक कानूनों का असर कई छोटे गांवों पर नहीं पड़ा. साल 1980 के दशक में प्रसिद्ध मानवशास्त्री नैन्सी लेविन ने इस समुदाय और प्रथा पर गहरा अध्ययन किया. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि यह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की मजबूरी है, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. कानूनी पाबंदियों के बाद भी यह परंपरा लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनी हुई है.