PM मोदी की बात विदेशी नेताओं तक पहुंचाने वाले इंटरप्रेटर को मिलती है मोटी सैलरी, सिलेक्शन का लंबा चौड़ा है प्रोसेस

PM Interpreter: एक इंटरप्रेटर के पास कम से कम स्नातक की डिग्री (किसी भी विषय में) होनी चाहिए। इसके अलावा, अगर आपने भाषा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध या राजनीति विज्ञान जैसे विषय चुने हैं, तो आपको वरीयता दी जाएगी।

Published by Shubahm Srivastava

PM Interpreter: चीन के तियानजिन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भारत, रूस समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए हैं। अब इश दौरान SCO समिट की कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग साथ में बातें करते हुए नजर आ रहे हैं। इन नेताओं के अलावा इनके साथ कुछ और लोग भी साथ नजर आते हैं, जिन्हें दुभाषिया (interpreter) कहा जाता है।

इनका काम पीएम की हर बात विदेशी नेता तक और उनकी बात पीएम तक उनकी भाषा में पहुंचाना होता है। आसान भाषा में कहे तो पीएम और दूसरे देशों के बीच बातचीत की असली कड़ी होता है। इसके चलते दुभाषिया का रोल काफी अहम होता है।

कैसे चुना जाता है पीएम का आधिकारिक इंटरप्रेटर?

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक दुभाषिया बनना कोई आसान काम नहीं है। प्रधानमंत्री का आधिकारिक दुभाषिया बनने के लिए व्यक्ति में भाषाई ज्ञान और सांस्कृतिक समझ होनी चाहिए। वैसे, आपको बता दें कि इसके लिए ज़्यादातर इंटरप्रेटर का चयन विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) से किया जाता है।

इंटरप्रेटर बनने के लिए योग्यता

खबरों के अनुसार, एक इंटरप्रेटर के पास कम से कम स्नातक की डिग्री (किसी भी विषय में) होनी चाहिए। इसके अलावा, अगर आपने भाषा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध या राजनीति विज्ञान जैसे विषय चुने हैं, तो आपको वरीयता दी जाएगी। दुभाषिया बनने के लिए व्यक्ति को कम से कम दो भाषाओं में पूर्ण निपुणता होनी चाहिए।

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उदाहरण के लिए, एक हिंदी या अंग्रेजी और दूसरी कोई विदेशी भाषा जैसे फ्रेंच, रूसी, स्पेनिश, जर्मन, चीनी या अरबी। इन भाषाओं को पूरी तरह से बोलने, पढ़ने और लिखने में सक्षम होना चाहिए।

इंटरप्रेटर की सैलरी

प्रधानमंत्री के इंटरप्रेटर की सैलरी भी अच्छी-खासी होती है। अगर आप IFS अधिकारी हैं, तो सातवें वेतन आयोग के अनुसार, शुरुआती सैलरी लगभग 56,100 रुपये प्रति माह होती है और अगर आपकी पोस्टिंग विदेश में होती है, तो आपको स्पेशल फॉरेन अलाउंस भी मिलता है।

खास बात यह है कि जैसे-जैसे पद और अनुभव बढ़ता है, सैलरी 1.5 लाख रुपये से 2.25 लाख रुपये प्रति माह तक पहुँच जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि दुभाषिए को सरकारी सुविधाएँ (Government facilities) भी मिलती हैं, जिनमें मुफ़्त आवास, कार, सुरक्षा, मेडिकल सुविधा शामिल है और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठाती है।

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