मुझे तुम्हें छू लेने दो ऊपर से… जब एक्टर को झेलना पड़ा ऐसा गंदा बर्ताव, शर्त सुन हो गया था निशब्द

अंकित गुप्ता की कहानी यह बताती है कि एंटरटेनमेंट वर्ल्ड की खूबसूरत दुनिया के पीछे कई काले सच छिपे हैं लेकिन इन परिस्थितियों में भी अगर कोई अपने सिद्धांतों पर अड़ा रहे, तो वह सम्मान और पॉपुलैरिटी दोनों कमा सकता है

Published by Anuradha Kashyap

फेमस टीवी एक्टर अंकित गुप्ता ने ‘साड्डा हक’, ‘बेगूसराय’, ‘उडारियां’ और ‘जुनूनियत’ जैसे शोज़ में काम किया है और लोगों के दिलों में जगह बनाई है, आपने उन्हें ‘बिग बॉस 16’ में भी देखा गया था, जहां प्रियंका चाहर चौधरी के साथ उनकी केमिस्ट्री आज भी लोगों को बहुत पसंद आती है लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने स्ट्रगल के दिनों का एक ऐसा सच शेयर किया, जिसने सभी को अंदर से झकझोर कर रख दिया. अंकित ने साफ कहा कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री जितनी खूबसूरत बाहर से दिखाई देती है, उसकी हकीकत उतनी ही कड़वी होती है. इसमें से एक बड़ा सच है “कास्टिंग काउच” — यानी काम दिलाने के बदले पर्सनल समझौते की मांग करना होता है.

स्ट्रगल के दिनों का कड़वा एक्सपीरियंस

अंकित गुप्ता ने यह खुलासा किया है कि जब वह इंडस्ट्री में काम पाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे, तब उन्हें कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने उनसे अजीब मांगें रखीं. उन्होंने बताया कि कुछ लोग बड़े-बड़े नाम लेकर डींगे हांकते थे और कहते थे—“मैंने इसको बनाया, उसको लॉन्च किया” इनका मकसद सिर्फ इतना होता था कि सामने वाला इन्फ्लुएंस हो जाए और उनकी शर्तें मान ले. अंकित ने कहा कि उनसे कहा गया—“हर कोई ऐसा ही करता है, अंकित, अगर तुम अभी नहीं करोगे, तो दो-तीन साल बाद खुद आओगे और कहोगे ‘अब कर लो’, लेकिन तब मैं नहीं करूंगा.

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सीमा लांघने की कोशिश ने किया उन्हें हैरान

अंकित ने यह भी बताया कि कुछ मुलाकातों में हालात इतने अनकंफरटेबल हो गए थे कि उन्हें बहुत परेशान होना पड़ा, उन्होंने कहा कि ऐसे लोग यहाँ तक कहने लगे—“कम से कम मुझे छूने तो दो” कुछ लोग घुटनों पर बैठकर उन्हें मनाने की कोशिश भी करते थे. यह एक्सपीरियंस उनके लिए बेहद अपमानजनक और चौंकाने वाला था. अंकित का मानना है कि ये सभी सिचुएशंस साफ दिखाती हैं कि इंडस्ट्री में टैलेंट और मेहनत से ज्यादा समझौते को अहमियत दी जाती है.

कास्टिंग काउच हर इंडस्ट्री में है मौजूद

अंकित ने यह भी कहा कि कास्टिंग काउच की समस्या सिर्फ टीवी या फिल्मों तक नहीं है, बल्कि हर इंडस्ट्री में अलग-अलग रूपों में मौजूद है, फर्क बस इतना है कि कुछ जगह यह खुलकर सामने आता है, तो कहीं छुपकर चलता है. उनके एक्सपीरियंस से यह साफ होता है कि कई बार युवा और नए कलाकारों की मजबूरी और उनके सपनों का फायदा उठाने की कोशिश की जाती है.

Anuradha Kashyap

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