Waheeda Rehman Biography: 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘तीसरी कसम’ में एक्ट्रेस वहीदा रहमान ने ‘हीराबाई’ की भूमिका जिस शिद्दत से निभाई है वह साफ-साफ नजर आती है. इस फिल्म में हीराबाई नर्तकी है, जो अपने गुस्से, नृत्य, प्यार, समर्पण और नाज़-ओ-नखरों से दर्शकों को अपनी ओर खींचती है. फिल्म देखने के दौरान हर संवेदनशील दर्शक हीराबाई (वहीदा रहमान) से इश्क कर बैठता है.
बिल्कुल हिरामन (राज कपूर) की तरह. राज कपूर और वहीदा रहमान की यह इकलौती फिल्म होगी, जिसमें एक्टर फिल्म के किरदार से बड़ा नहीं होता है. ऐसा हुआ तो यह फिल्म निर्माता, निर्देशक और कलाकार की सफलता है. यह फिल्म आज भी देखी जाती है और दर्शक हीराबाई को देखते हैं ना कि वहीदा रहमान को. यह महान एक्ट्रेस वहीदा रहमान की एक्टिंग की बानगी भर है.
उन्होंने अपने सफल फिल्मी करियर में ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’ और ‘गाइड’ जैसी कालजयी फिल्में कीं तो व्यावसायिक रूप से ‘ ‘सीआईडी’, ‘चौदहवीं का चांद’, ‘साहब बीवी और गुलाम’ में भी नजर आईं. 1960 के दशक की सबसे खूबसूरत और कामयाब एक्ट्रेस में शुमार वहीदा रहमान ने अपनी शर्तों पर फिल्म इंडस्ट्री में काम किया. फिल्मों में काम करने के दौरान विवाद ना हों ऐसा नहीं हो सकता है. वहीदा रहमान भी इससे नहीं बचीं. इस स्टोरी में हम बताएंगे वहीदा रहमान की फिल्मों, प्यार और निजी जिंदगी के बारे में दिलचस्प बातें.
भरतनाट्यम सीखने की जिद कैसे मां ने की पूरी
3 फरवरी, 1938 को चेंगलपट्टू (तमिलनाडु) में जन्मीं वहीदा रहमान के पिता अब्दुर रहमान जिला कमिश्नर थे, जबकि मां का नाम मुमताज था और वह घरेलू महिला थीं. 4 बहनों में सबसे छोटी वहीदा बहुत ही खूबसूरत थीं. आसपड़ोस की लड़कियों और रिश्तेदारों के बच्चों को भरतनाट्यम सीखते देख वहीदा को भी इस नृत्य से एक तरह का लगाव हो गया. घर में अक्सर अपनी अम्मी से भरतनाट्यम सीखने की जिद करतीं.
तमिलनाडु में भले ही लड़कियों का भरतनाट्यम सीखना आम हो, लेकिन उस दौर में यह सबके लिए मुमकिन नहीं होता था. ऊपर से वहीदा का परिवार मुस्लिम और रूढ़िवादी विचारधारा का था. पहली ही बार में मना कर दिया गया, लेकिन वहीदा जिद पर अड़ी रहीं. आखिरकार वहीदा के आगे अम्मी मुमताज को झुकना पड़ा. वह उन्हें भरतनाट्यम के मशहूर गुरु जयलक्ष्मी अल्वा के पास ले गईं.
मुस्लिम होने की वजह से गुरु ने किया भरतनाट्यम सिखाने से इन्कार
अम्मी मुमताज बेटी वहीदा रहमान को लेकर चेन्नई (तब मद्रास) पहुंचीं तो यहां गुरु जयलक्ष्मी अल्वा ने अजीब सी शर्त रख दी. शुरुआत में गुरु जयलक्ष्मी अल्वा ने वहीदा के मुस्लिम होने पर साफ तौर पर भरतनाट्यम सिखाने से ही इन्कार कर दिया. इस पर वहीदा जिद पर अड़ गईं तो तो गुरुजी ने उनसे कुंडली लाने को कहा. मुस्लिमों में कुंडली का चलन नहीं है. ऐसे में गुरुजी ने खुद वहीदा की कुंडली बनाई.
इसके बाद गुरुजी ने बारीकी से वहीदा की कुंडली देखी तो वो हैरान रह गए. तपाक से बोले- ‘तुम मेरी आखिरी और सबसे बेहतरीन शिष्य बनोगी.’ इतना ही उन्होंने यह भी कहा था कि बहुत कामयाब भी बनोगी. गुरुजी की यह भविष्यवाणी 100 प्रतिशत सही साबित हुई. 22 जुलाई, 2015 को 81 साल की उम्र में गुरु जयलक्ष्मी अल्वा ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी भविष्यवाणी 100 प्रतिशत सच साबित हुई.
वहीदा रहमान को कैसे मिली पहली फिल्म?
2021 में सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत के सर्वोच्च पुरस्कार दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित वहीदा रहमान ने तेलुगु फिल्म ‘रोजुलु मराई’ (1955) से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि वह हिंदी फिल्मों में काम करेंगीं. उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘सीआईडी’ थी.
इसके बाद वहीदा रहमान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘साहिब बीबी और गुलाम’, ‘गाइड’, ‘काला बाजार’, ‘रूप की रानी चोरों का राजा’, ‘कागज के फूल’, ‘राम और श्याम’, ‘आदमी’, ‘तीसरी कसम’ और ‘खामोशी’ जैसी उम्दा फिल्में कीं. इसके अलावा भी कई फिल्में की. 1960 के दशक में वह इंडस्ट्री की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस में शुमार थीं.
चाहते हुए भी टूट गया डॉक्टर बनने का सपना
वहीदा ने भले ही भरतनाट्यम सीखा, लेकिन उनकी फिल्मों में काम करने कोई ख्वाहिश नहीं थी. वह बचपन से ही डॉक्टर बनने की तमन्ना पाले हुए थीं. शायद किस्मत कुछ और ही चाहती थी. वहीदा यही कोई 13 साल की रहीं होंगी जब अब्बू का इंतकाल हो गया. पिता भले ही जिला कमिश्नर थे, लेकिन उनके जाने के बाद परिवार की आर्थिक हालत खराब हो गई. रिश्ते में बुआ ने मदद की. परिवार की आर्थिक मदद के लिए और डॉक्टर बनने का ख्वाब पूरा करने के लिए फिल्मी दुनिया में कदम रखा.
बताया जाता है कि अब्बू के एक दोस्त के कहने पर वहीदा को पहली फिल्म में एक साधारण रोल मिला. तेलुगु भाषा की फिल्म में वहीदा लीड रोल में नहीं थीं. साधारण सा रोल था, लेकिन वहीदा का अभिनय दर्शकों को पसंद आया. इसमें अच्छी बात यह रही कि वहीदा को जो रोल मिला वह डांसर का था. इस तरह तेलुगु फिल्म ‘रोजुलु मराई’ (1955) से वहीदा रहमान ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की.
इसका प्रीमियर हैदराबाद में रखा गया था. इत्तेफाक से इस प्रीमियर में गुरुदत्त भी पहुंचे थे. उन्होंने वहीदा का रोल देखा तो उन्हें मुंबई (तब बॉम्बे) आने का ऑफर दिया. कुछ समय बाद ही वहीदा मुंबई आईं. इसके बाद वादे के मुताबिक, गुरुदत्त के प्रॉडक्शन में बनी फिल्म सीआईडी (1956) में काम किया. बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस फिल्म को राज खोसला ने डायरेक्ट किया था.
वहीदा की 3 में से एक शर्त से गुस्सा हो गए थे राज खोसला
वहीदा रहमान की पहली फिल्म ‘सीआईडी’ है, जिसमें देव आनंद उनके अपोजिट थे. गुरुदत्त के बुलावे पर वहीदा रहमान मुंबई आ गईं. फिल्म को लेकर पहली सिटिंग राज खोसला के साथ हुई. इसमें गुरुदत्त भी शामिल थे. रोल और फिल्म फाइनल होने वाली थी. इस बीच वहीदा ने 3 शर्तें रख दीं, जिससे राज खोसला परेशान हो गए. इनमें पहली शर्त राज खोसला की थी, जिस पर वहीदा राजी नहीं हुईं.
दरअसल, राज खोसला ने गुरुदत्त के सामने ही कहा कि वहीदा नाम सेक्सी नहीं है, अगर आपको फिल्म में काम करना है तो नाम बदलना पड़ेगा. इस पर एक्ट्रेस खफा हो गईं. उन्होंने गुरुदत्त के सामने ही राज खोसला से कहा कि ये नाम मुझे मेरे माता-पिता ने दिया है और मैं इसी के साथ पहचान बनाऊंगी. इस पर गुरुदत्त और राज खोसला राजी हो गए, लेकिन एक्ट्रेस ने एक और शर्त सामने रख दी.
वहीदा ने कहा कि शूटिंग के दौरान उनकी मां सेट पर आएंगी. इस पर राज खोसला और गुरुदत्त दोनों को एतराज नहीं था. फिर तीसरी शर्त भी वहीदा रहमान की सामने आ गई. इसने गुरुदत्त और राज खोसला दोनों को परेशान कर दिया, क्योंक वहीदा ने कहा कि वह फिल्मों में अपनी कॉस्ट्यूम खुद फाइनल करेंगी और किसी के कहने पर छोटे कपड़े या बिकिनी नहीं पहनेंगीं. आखिर शर्त पर राज खोसला भड़क गए. वहीदा के सामने ही राज खोसला ने गुरुदत्त से शिकायत भरे लहजे में कहा दिया- ‘तुमने इस लड़की को साइन किया है या इस लड़की ने तुम्हें.’
वहीदा ने हमेशा फिल्मों में भी पहने शालीन कपड़े
वहीदा रहमान ने पहली हिंदी फिल्म ‘सीआईडी’ में शर्तों के मुताबिक बहुत ही शालीन कपड़े पहने. यह सिलसिला फिल्मी करियर के अंत तक जारी रहा. याद कीजिए भारतीय सिनेमा की कालजयी फिल्म ‘गाइड’ को, जिसमें उन्होंने रोज़ी नाम की लड़की का रोल किया, लेकिन पूरी फिल्म में वह साड़ी में नजर आईं.
किसी ने यह नोटिस तक नहीं किया कि रोज़ी नाम और कैरेक्टर दोनों मॉडर्न होने चाहिए थे. इसकी वजह यह थी कि दर्शक वहीदा रहमान की एक्टिंग और खूबसूरती में इस कदर डूबे थे कि यह लॉजिक सालों तक नहीं तलाश पाए.
वहीदा रहमान खुदी मानती थीं कि उनका शरीर रिवीलिंग कपड़ों के लिए मुनासिब नहीं है. फिल्मों में कभी अश्लील कपड़ों में नजर नहीं आईं, जिन्हें आज के समय में सेक्सी ड्रेस बोला जाता है. यहां तक कि निजी जिंदगी में भी उन्होंने स्लीवलेस कपड़े तक नहीं पहने. एक्ट्रेस की सादगी पर फिदा अमिताभ बच्चन ने एक बार कहा था कि वह वहीदा रहमान के साथ रोमांस करना चाहते हैं.
वहीदा की एक्टिंग और खूबसूरती ने दिलवाई ‘गाइड’
हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म ‘गाइड’ में पहले वहीदा को कास्ट नहीं किया जाना था. कहा जाता है कि फिल्म डायरेक्ट कर रहे देव आनंद के भाई विजय आनंद को वहीदा रहमान से सबसे बड़ी शिकायत यही थी कि वह अंग्रेजी बोलना नहीं जानती थीं.
इसके साथ ही इंडस्ड्री में यह भी मशहूर था कि वहीदा मॉडर्न कपड़े नहीं पहनेंगीं. विजय आनंद ने वहीदा को रोज़ी के रोल में अनफिट करार देते हुए मना कर दिया. जब यह जानकारी देव आनंद को लगी तो वह विजय आनंद से खफा हो गए. उन्होंने वहीदा को लेने पर जोर देते हुए कहा कि इसमें ‘वह’ नहीं होंगी तो फिल्म में काम नहीं करेंगे.
वहीदा रहमान से शादी करना चाहते थे गुरुदत्त
बताया जाता है कि महान फिल्मकार गुरुदत्त वहीदा की खूबसूरती पर उसी दिन से फिदा थे जब उन्होंने उन्हें हैदराबाद में फिल्म के प्रीमियर पर देखा था. साथ ही गुरुदत्त ने बतौर कलाकार वहीदा को परखा भी.
‘प्यासा’ के बाद वहीदा और गुरु दत्त एक साथ ‘कागज के फूल’ और ‘चौदहवीं का चांद’ समेत कई फिल्मों में काम किया. इस दौरान साथ-साथ रहते गुरुदत्त वहीदा से इश्क कर बैठे. बावजूद इसके कि गुरुदत्त पहले से गीता रॉय से शादी कर चुके थे. गुरुदत्त एक्ट्रेस वहीदा रहमान से इस कदर प्यार करते थे कि वह शादी करने के लिए अपना धर्म बदलने के लिए भी तैयार थे. यह जानकारी जैसे ही गीता को लगी तो उन्होंने घर छोड़ दिया और अपने बच्चों को भी साथ ले गईं.
उधर, शादी खत्म होने के डर से 1963 में गुरु दत्त ने वहीदा से मिलना-जुलना पूरी तरह बंद कर दिया. पत्नी गीता वापस गुरुदत्त की जिंदगी में नहीं लौटीं. धीरे-धीरे वहीदा से भी दूरी बन गई. आखिरकार अकेले रहते हुए 1964 में शराब के ओवरडोज से उनका निधन हो गया.
वर्ष 1974 में वहीदा रहमान ने फिल्मी दुनिया से जुड़े शशि रेखी से शादी की. साल 2000 में लंबी बीमारी के कारण शशि रेखी की मृत्यु हो गई. दोनों के बच्चे सोहेल और काशवी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने लेखक हैं.

