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Raima Sen comeback : चार साल का ब्रेक, अब दमदार कमबैक, राइमा सेन फिर दिखेंगी बॉलीवुड में

Raima Sen comeback Bollywood: राइमा सेन चार साल के ब्रेक के बाद हिंदी सिनेमा में वापसी कर रही हैं. 26 साल के लंबे करियर में उन्होंने विरासत के दबाव, कॉम्पिटिशन और अपने अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है. अब वह एक नए नजरिए और परिपक्वता के साथ अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं.

By: Ranjana Sharma | Last Updated: April 11, 2026 5:52:42 PM IST



Raima Sen comeback Bollywood: चार साल के लंबे इंतजार के बाद राइमा सेन एक बार फिर हिंदी सिनेमा में वापसी कर रही हैं. लेकिन यह वापसी सिर्फ एक नई फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके बदले हुए नजरिए, परिपक्व सोच और अपनी अलग पहचान बनाने की जिद को भी दिखाती है.

वापसी में देरी, लेकिन जज्बा बरकरार

अपनी पिछली हिंदी परियोजना Mai (2022) के बाद राइमा सेन ने बॉलीवुड से थोड़ा ब्रेक लिया. अब जब वह लौट रही हैं, तो खुद भी मानती हैं कि इस बार वापसी में अपेक्षा से ज्यादा समय लग गया. हालांकि, उनके लिए हिंदी इंडस्ट्री में काम करना हमेशा से खास रहा है और वह इसे लेकर काफी उत्साहित हैं.

 नई शुरुआत का उत्साह

राइमा सेन इस समय अपने फिल्मी करियर के 26 साल पूरे होने का जश्न मना रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म Godmother से की थी, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई. अब वह निर्देशक हंसल मेहता की फिल्म फैमिली बिजनेस की तैयारी में जुटी हैं, जो इस साल के आखिर तक रिलीज हो सकती है.

पहला मौका और घबराहट 

राइमा अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि जब उन्हें पहली फिल्म का ऑफर मिला, तब वह कोलकाता में रहने वाली 17 साल की एक साधारण लड़की थीं. उस समय निर्देशक विनय शुक्ला स्क्रीन टेस्ट के लिए शहर आए थे और उन्होंने राइमा को यह मौका दिया. दिग्गज अभिनेत्रीशबाना आज़मी के साथ काम करने का मौका मिलना उनके लिए जितना बड़ा अवसर था, उतना ही डराने वाला भी. वह बताती हैं कि शूटिंग के दौरान हर दिन उन्हें घबराहट होती थी, लेकिन उन्होंने खुद को एक मौका देने का फैसला किया.

आसान नहीं था रास्ता

मून मून सेन और भरत देव वर्माकी बेटी होने के बावजूद राइमा को कभी भी इंडस्ट्री में रेडीमेड रास्ता नहीं मिला. उनके माता-पिता ने साफ कहा था कि अगर उन्हें फिल्मों में आना है, तो उन्हें अपनी पहचान खुद बनानी होगी. राइमा बताती हैं कि उनके परिवार ने कभी भी फिल्ममेकर्स से उनके लिए काम नहीं मांगा और न ही उनके करियर में दखल दिया. यही वजह है कि उन्होंने अपने दम पर आगे बढ़ने की कोशिश की. राइमा मानती हैं कि करियर के शुरुआती दिनों में वह काफी बेफिक्र थीं और जो भी काम मिलता था, उसे स्वीकार कर लेती थीं. लेकिन अब समय के साथ उनका नजरिया पूरी तरह बदल चुका है. अब वह अपने काम को लेकर ज्यादा सजग और जिम्मेदार हो गई हैं और स्क्रिप्ट, किरदार और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर ही फैसले लेती हैं.

कॉम्पिटिशन और  जंग

राइमा सेन बॉलीवुड की प्रतिस्पर्धा को लेकर भी खुलकर बात करती हैं. उनके मुताबिक, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में रीजनल सिनेमा के मुकाबले कहीं ज्यादा कॉम्पिटिशन है, जहां हर कलाकार को खुद को साबित करना पड़ता है. नेपोटिज्म और फेवरिटिज्म पर चल रही बहस पर वह कहती हैं कि यह मुद्दा हमेशा से चर्चा में रहा है. हालांकि, उनका मानना है कि शुरुआती मौके भले ही किसी को विरासत के कारण मिल जाएं, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए टैलेंट ही सबसे बड़ा आधार होता है.

विरासत का दबाव 

लेजेंडरी अभिनेत्री सुचित्रा सेन की पोती और एक फिल्मी परिवार से आने की वजह से राइमा पर शुरुआत से ही काफी दबाव था. लोगों की अपेक्षाएं उनसे बहुत ज्यादा थीं और हर कोई चाहता था कि वह अपनी विरासत के अनुरूप ही प्रदर्शन करें. राइमा मानती हैं कि वह अपनी पहली ही फिल्म से उस स्तर तक नहीं पहुंच सकती थीं. उन्हें अपनी पहचान बनाने में समय लगा. फिल्म Chokher Bali के बाद जाकर लोगों ने उन्हें एक गंभीर और सक्षम अभिनेत्री के रूप में स्वीकार किया. आज राइमा सेन के लिए उनकी विरासत एक बोझ नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन चुकी है. वह मानती हैं कि अब लोग उन्हें उनके नाम और काम से पहचानते हैं. हालांकि, वह सिर्फ अपनी पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं. उनका लक्ष्य है कि वह अपनी अलग पहचान बनाएं और हिंदी सिनेमा में भी खुद को एक मजबूत कलाकार के रूप में स्थापित करें.

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