Aishwarya Rai Bachchan : कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर नीता लुल्ला ने तीन दशक से ज्यादा के करियर में सबसे मशहूर फ़िल्मों की विज़ुअल भाषा को आकार देने का काम किया है. उनके बड़े कामों में से एक आशुतोष गोवारिकर की 2008 की ऐतिहासिक फ़िल्म जोधा अकबर थी, इस फिल्म में ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय बच्चन एक साथ नजर आए थे. फिल्म के कॉस्ट्यूम सिर्फ़ कपड़ों की पसंद नहीं थे, बल्कि कारीगरी के आर्किटेक्चरल कमाल थे. राजपूत सिल्हूट से लेकर शानदार मुगल डिटेलिंग तक, कपड़ों में सभी को शामिल किया गया था. प्रोडक्शन में लगभग 400 किलोग्राम सोना, कीमती पत्थर और ज्वेलरी सेट शामिल थे. जिन्हें बनाने में 600 से ज्यादा दिन लगे थे. ऐश्वर्या का जोधा के रूप में शाही बदलाव फिल्में के खास विजुअल हाइलाइट्स में से एक बन गया.
ज्वेलरी के पांच सिक्योरिटी गार्ड
ज्वेलरी के बड़े साइज और कीमत को देखते हुए इन डिज़ाइनर कॉस्ट्यूम की रक्षा करने के लिए सिक्योरिटी रखना पड़ा. NDTV के साथ बातचीत में, नीता लुल्ला ने बताया कि ऐश्वर्या राय बच्चन के पहने हुए गहनों के लिए गार्ड लगाए गए थे. उन्होंने आगे कहा कि ज्वेलरी रूम में करीब 5 सिक्योरिटी गार्ड थे. फिर इसे नोट किया गया और एक्टर को दिया गया, फिर वापस ले लिया गया. फिर दोबारा लिस्ट करके वापस दे दिया गया.” हर पीस को ध्यान से लॉग किया गया, निकाला गया और फिर से इसे चेक किया गया. यह एक प्रोसेस था जो कॉस्ट्यूम से जुड़ी
कीमत और ऐतिहासिक सटीकता को दिखाता था. वह दिन जब सबको लगा कि कोई
गहना खो गया है.
सख्त प्रोटोकॉल के बावजूद, सेट पर एक पल ऐसा आया जब सब घबरा गए थे. नीता ने याद करते हुए कहा, “मुझे एक मज़ेदार किस्सा याद है, जब एक झूमके से एक छोटा सा मोती गिर गया था. सिक्योरिटी गार्ड दौड़कर मेरे पास आया और कहा कि कुछ खो गया है. कुछ सेकंड के लिए पूरी टूम को सबसे बुरे का डर लगा. हम सबसे अपनी सांस रोक ली और पूछा कि क्या खो गया है, तो उसने कहा कि एक मोती खो गया है. फिर हमने राहत की सांस ली. जब हमें लगा कि गहना खो गया है. तो सबने वॉकी-टॉक बजाई और घबरा गए. सब दौड़कर आए. जो मोती खो गया था, उससे सेट पर थोड़ी देर के लिए हाई-अलर्ट अफरा-तफरी मच गई थी. प्रोडक्शन अपने खजाने को कितनी गंभीरता से संभालता था. जो मोती खो गया था, उससे सेट पर थोड़ी देर लिए हाई अलर्ट अफरा-तफरी मच गई. इस बात का सबूत था कि प्रोडक्शन अपने खजाने को कितनी गंभीरता से संभालता था.
सिर्फ नाम नहीं, एक इमोशन है, जानिए क्यों मां का नाम जोड़ते हैं संजय लीला भंसाली?
ऋतिक रोशन का हर बात पर ध्यान
जहां ऐश्वर्या की ज्वेलरी सिक्योरिटी के लिए थी, वहीं ऋतिक रोशन के बड़े कवच के लिए हिम्मत चाहिए थी. मुगल बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मत अकबर का रोल करने का मतलब था वो भी भारी मेटल कवच को पहनना, खासकर बड़े युद्ध वाले सीन में. नीता ने माना कि उन्हें वजन को लेकर शिकायतों की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाए यह एक्टर की सटीकता देखकर हैरान रह गईं. उन्होंने आगे कहा कि मैंने जैसा सोचा था, उसके उलट ऋतिक मेरे पास आकर शिकायत करेंगे कि मैं उन पर कितना वजन बड़ा रही हूं. लेकिन वह काफी ज्यादा कोऑपरेटिव थे. सेट पर इस आदमी ने देखा कि आर्महोल दूसरे वाले से चौथाई इंच बड़ा था. मैं हैरान रह गए, हालांकि, मैंने कभी भी इस पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कवच पहना हुआ था और मुझसे इसे बिना उतारे छेनी से उसे काटने के लिए कहा गया. यह किस्सा कॉस्ट्यूम और कैरेक्टर को लेकर बहुत ध्यान देने वाले तरीके को दिखाता है.

