क्या 8 घंटे की शूटिंग सीमा दीपिका की नई सोच है या पुराना किस्सा दोहराती है?

बॉलीवुड सिर्फ फिल्मों का जादू नहीं, बल्कि उसके पीछे चलने वाली दिलचस्प कहानियों का भी खजाना है. शूटिंग फ्लोर पर क्या होता है, कैसे होता है और किसके नखरे कैसे पूरे किए जाते हैं यह सब सुनने में उतना ही मजेदार होता है जितना पर्दे पर सितारों का ग्लैमर.

Published by Komal Singh

हाल ही में डाइरेक्टर तिन्नू आनंद ने एक पुराना किस्सा साझा किया जिसने इंडस्ट्री के कामकाज के तौर-तरीकों पर फिर से चर्चा छेड़ दी. उन्होंने बताया कि कैसे एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें नर्वस ब्रेकडाउन का सामना करना पड़ा. वजह थी सितारों के शिफ्ट और कामकाज को लेकर उनके अलग-अलग नियम.

शशि कपूर और ऋषि कपूर का शिफ्ट ड्रामा

तिन्नू आनंद ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के वक्त शशि कपूर ने 8 घंटे की शिफ्ट को महज़ 2 घंटे में समेटने का दबाव बनाया. वहीं दूसरी तरफ ऋषि कपूर का सख्त नियम था शाम 6 बजे के बाद मैं सेट पर नहीं रुकूंगा. सोचिए, एक तरफ 8 घंटे की मेहनत को 2 घंटे में पूरा करने की जिद और दूसरी तरफ घड़ी देखकर सेट छोड़ देने की आदत! ऐसे हालात में डायरेक्टर का पागल होना लाजमी था. आनंद ने खुद माना कि इन डिमांड्स और स्टार्स की शर्तों ने उन्हें इतना परेशान किया कि उनका नर्वस ब्रेकडाउन तक हो गया. यह किस्सा सुनकर साफ होता है कि ग्लैमर के पीछे इंडस्ट्री कितनी मुश्किलों और दबावों से भरी रहती है.

दीपिका पादुकोण का बयान

अब जरा कट मारते हैं आज की पीढ़ी पर हाल ही में दीपिका पादुकोण भी अपनी शर्तों को लेकर सुर्खियों में रहीं. उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि वे 8 घंटे से ज़्यादा शूटिंग नहीं करेंगी. उनकी नज़र में वर्क-लाइफ बैलेंस और मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज़रूरी है.दीपिका का यह बयान भले ही उस दौर से अलग लगे, लेकिन असल में यह उसी बहस की अगली कड़ी है, काम का बोझ, स्टार्स की सीमाएँ और प्रोड्यूसर्स की उम्मीदें. फर्क बस इतना है कि आज इसे “प्रोफेशनलिज़्म” और “सेल्फ-केयर” के नाम से देखा जाता है, जबकि पहले इसे “स्टार नखरे”कहकर खारिज कर दिया जाता था.

बदलते वक्त का बदलता रवैया

अगर गौर करें तो यह सिलसिला नया नहीं है. 70-80 के दशक में भी सितारे अपनी शर्तों पर काम करते थे. बस उस दौर में इसका असर फिल्म की यूनिट और डायरेक्टर्स पर साफ दिखता था. आजकल सितारे अपने अधिकारों और सीमाओं के बारे में ज्यादा खुलकर बोलते हैं, और इंडस्ट्री भी उन्हें मान्यता देने लगी है.शशि कपूर और ऋषि कपूर के समय में डायरेक्टर्स को घड़ी देखकर काम करवाना पड़ता था. अब दीपिका पादुकोण जैसी सुपरस्टार्स कह देती हैं . 8 घंटे बस, उसके बाद नहीं. फर्क सिर्फ इतना है कि आज के दौर में इसे पब्लिक सपोर्ट भी मिलता है, क्योंकि दर्शक भी जानते हैं कि लगातार 12-14 घंटे शूट करना किसी मशीन का काम है, इंसान का नहीं.

नखरे या जरूरत?

सवाल यही है, क्या यह स्टार्स के नखरे हैं या फिर उनकी जरूरी डिमांड्स? शशि कपूर और ऋषि कपूर की शर्तें डायरेक्टर के लिए सिरदर्द थीं, जबकि दीपिका की शर्तें एक नए दौर की निशानी हैं, जहां मानसिक स्वास्थ्य और वर्क-लाइफ बैलेंस पर जोर दिया जाता है.गॉसिप हो या हकीकत, एक बात तो पक्की है—बॉलीवुड में कैमरे के पीछे चलने वाली ये कहानियां हमेशा मजेदार और सोचने पर मजबूर करने वाली होती हैं.

Komal Singh
Published by Komal Singh

Recent Posts

पाक करेगा टी20 वर्ल्ड कप को बॉयकॉट! जानें इस बार क्या है PCB की भारत न आने की साजिश?

T20 World Cup 2026: कई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पाकिस्तान बांग्लादेश के समर्थन…

January 19, 2026

BJP Presidents List: नितिन नबीन बनेंगे बीजेपी के अगले अध्यक्ष, यहां देखें 1980 से 2020 तक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्षों की लिस्ट

BJP Party Presidents: 2019 तक BJP राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व (303 सीटें) के मामले में…

January 19, 2026

भीख नहीं मांगी, लोग खुद देते थे पैसे! करोड़पति भिखारी की हैरान कर देने वाली कहानी

Indore Rich Beggar Mangilal: मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दिव्यांग भिखारी जो सालों से…

January 19, 2026