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14 मिनट 41 सेकेंड का दर्दभरा गाना सुनकर रो पड़े थे लाखों लोग, 9वीं फेल सिंगर ने तोड़ डाले सारे रिकॉर्ड और बन गया हर टूटे दिल की धड़कन

90’s के दौर में कई ऐसे सिंगर्स आए जिन्होंने अपनी आवाज़ से म्यूजिक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया,आज हम बात करेंगे एक ऐसे गाने की जो न सिर्फ भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला सोलो एलबम बना बल्कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ। भले ही इस गाने को आए हुए काफी साल हो गए हों, लेकिन आज भी लोग इसे बड़े शौक से सुनते हैं।

Tum To Thahre Pardesi: अल्ताफ राजा का जन्म 15 अक्टूबर 1967 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उनके माता-पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई-लिखाई करके एक बेहतर करियर बनाए, इसी वजह से उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई भेजा गया। पहले तो उन्होंने नागपुर में पांचवीं तक पढ़ाई की, उसके बाद मुंबई के एंटोनियो डिसूजा स्कूल में दाखिला लिया। खास बात यह थी कि इस स्कूल से राज कपूर जैसी बड़ी हस्तियां पढ़ चुकी थीं। हालांकि, अल्ताफ पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं ले पाए और नौवीं तक की पढ़ाई करने के बाद वापस घर लौट आए। इसके बाद माता-पिता ने उन्हें कपड़े सिलने की क्लास में भी दाखिला दिलाया, लेकिन वहां भी मन नहीं लगा। इसी दौरान उन्होंने अपनी मां को बताया कि वह संगीत सीखना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने हारमोनियम बजाना शुरू किया और अपनी मां के साथ स्टेज पर कव्वाली प्रस्तुत करने लगे। यही से उनकी असली संगीत यात्रा शुरू हुई।

‘तुम तो ठहरे परदेसी’ और रातों-रात स्टारडम (Tum To Thahre Pardesi)

अल्ताफ राजा (Altaf Raja) ने 1990 के दशक में अपना पहला एल्बम रिलीज किया। यह एल्बम था ‘तुम तो ठहरे परदेसी (Tum To Thahre Pardesi), जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। यह गाना भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला सोलो एलबम बना और इसकी पॉपुलैरिटी इतनी बढ़ी कि इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया। लोगों ने उनकी आवाज को कव्वाली के नए अंदाज में खूब सराहा। उनकी गायकी में दर्द और जुदाई की झलक सुनकर श्रोता भावुक हो जाते थे। यही वजह थी कि ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ हर टूटे दिल की आवाज बन गया और अल्ताफ राजा को संगीत इंडस्ट्री में बड़ी पहचान दिला गया। उन्होंने कई अवॉर्ड भी जीते और 90 के दशक के सबसे लोकप्रिय सिंगर्स में शुमार हो गए।

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अब कहां हैं अल्ताफ राजा (Altaf Raja)?

सुपरहिट गाने देने के बाद धीरे-धीरे अल्ताफ राजा (Altaf Raja) इंडस्ट्री से दूर हो गए। लंबे समय तक उनकी आवाज फिल्मों और एलबम्स में सुनाई नहीं दी। हालांकि, साल 2021 में वेब सीरीज ‘इंदौरी इश्क’ के गाने से उन्होंने एक बार फिर वापसी की। इसके अलावा उन्होंने गुजराती फिल्म ‘सोनू तने मारा पर भरोसा नै के’ में कव्वाली गाकर सुर्खियां बटोरीं। खास बात यह थी कि गुजराती भाषा में यह पहली कव्वाली थी और अपने पुराने गानों की वजह से आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। उनकी आवाज और उनका दर्दभरा अंदाज आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है।

Shivashakti Narayan Singh

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