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PNB Scam Case: जाली दस्तावेजों से लोन किया मंजूर, फिर दूसरे अकाउंट में किया ट्रांसफर, कोर्ट ने पूर्व बैंक अधिकारियों के सुनाई ये सजा

Punajb National Bank Scam Case: पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में दो पूर्व अधिकारियों और एक पैनल वकील को दोषी ठहराया गया है. इनपर आरोप है कि सभी आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत जाली और फर्जी संपत्ति दस्तवेजों के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक, जोरबाग शाखा, नई दिल्ली से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से प्राप्त की.

Published by Hasnain Alam

PNB Scam Case Update: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 4 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में दो पूर्व अधिकारियों और एक पैनल वकील को दोषी ठहराया है. विशेष अदालत ने PNB जोरबाग शाखा की तत्कालीन प्रमुख कुलविंदर कौर जोहर और वरिष्ठ प्रबंधक रंजीव सुनेजा को तीन-तीन साल की सजा सुनाई. साथ ही दोनों पर 75000-75000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. 

वहीं बैंक के पैनल अधिवक्ता एन.एस. परिहार को ढाई साल की कैद की सजा सुनाई गई. एन.एस. परिहार पर 50000 रुपये का जुर्माना लगाया गया. अदालत ने कहा कि तीनों की मिलीभगत से घोटाला हुआ, जिससे सार्वजनिक धन को भारी नुकसान पहुंचा.

जाली दस्तावेजों से लोन के गए थे मंजूर

कोर्ट में आरोपियों पर जाली दस्तावेजों के जरिए लोन मंजूर कराने और राशि डायवर्ट करने का आरोप साबित हुए. जांच में बैंक के नियमों और प्रक्रियाओं की गंभीर अनदेखी सामने आई.

यही नहीं जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है. कोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि तीनों की मिलीभगत से इस घोटाले का अंजाम दिया गया है.

मुख्य आरोपी संजीव दीक्षित को भगोड़ा घोषित

अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी संजीव दीक्षित को भगोड़ा घोषित किया है, जबकि राहुल शर्मा और राजीव शर्मा को सबूत के आभाव में बरी कर दिया है.

बता दें कि सीबीआई ने इस मामले में एम/एस शंकर मेटल्स: संजय शर्मा, इंद्रा रानी तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 11 जुलाई 2013 को एफआईआर दर्ज किया था.

आरोप है कि सभी आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत जाली और फर्जी संपत्ति दस्तवेजों के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक, जोरबाग शाखा, नई दिल्ली से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से प्राप्त की. लोन की राशि को स्वीकृत उद्देश्य के अलावा अन्य कार्यों में ट्रांसफर कर दिया.

इसके बाद आरोपी संजय दीक्षित ने पीएनबी के अधिकारियों के. के जोहर, रंजीव सुनेजा, पैनल वकील एन. एस. परिहार तथा अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी संपत्ति दस्तवेजों और फर्जी केवाईसी दस्तवेजों के आधार पर चार करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सीमा स्वीकृत कराई.

Hasnain Alam
Published by Hasnain Alam

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