UPI Transaction New Guidelines: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) 1 अक्टूबर से यूपीआई ऐप के P2P सर्विस को बंद करने का फैसला लिया है. जिसका उद्देश्य सुरक्षा को मज़बूत करना और भुगतान संबंधी धोखाधड़ी को रोकना है. इसके बाद से सभी सदस्य बैंक और यूपीआई ऐप – जिनमें फ़ोनपे, गूगल पे और पेटीएम शामिल हैं – समय सीमा के बाद पी2पी लेनदेन शुरू, रूट या प्रोसेस नहीं कर पाएंगे.
बता दें कि ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ या ‘पुल ट्रांजेक्शन’ फीचर यूजर्स को यूपीआई के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति से धन का अनुरोध करने की अनुमति देती थी. शुरुआत में इसे सुविधाजनक उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया था, जैसे कि लंबित पुनर्भुगतानों के बारे में दोस्तों को याद दिलाना या बिलों का बंटवारा करना, लेकिन हाल ही में धोखेबाजों द्वारा इस सुविधा का दुरुपयोग किया गया है.
स्कैमर फीचर का उठा रहे थे गलत फायदा
स्कैमर अक्सर वैध संपर्क या अधिकारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसा कर उनके साथ स्कैम करते है, और उनके पैसों पर हाथ साफ कर लेते थे. एनपीसीआई ने पहले ऐसे अनुरोधों के लिए लेनदेन मूल्य को लगभग 2,000 तक सीमित कर दिया था, जिससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आई. हालांकि, इस सुविधा को पूरी तरह से हटाने के साथ, भुगतान संस्था का लक्ष्य इस जोखिम को पूरी तरह से समाप्त करना है.
मर्चेंट साइट्स के लेनदेन पर नहीं पड़ेगा असर
इस बदलाव का मर्चेंट साइट्स के लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. फ्लिपकार्ट, अमेज़न, स्विगी, ज़ोमैटो और आईआरसीटीसी जैसे प्लेटफ़ॉर्म अभी भी अपनी चेकआउट प्रक्रिया के तहत भुगतान अनुरोध भेज सकेंगे. इन पैमेंट रिक्वेस्ट के लिए यूजर अप्रूवल और UPI पिन ऑथेंटिकेशन की आवश्यकता होती है, जिससे ये लेनदेन का एक सुरक्षित तरीका बन जाते हैं.
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