CRISIL Report Thali Cost 2026: दुनिया में जगह-जगह चल रही जंग के चलते भारत की आम जनता की जेब पर भी काफी असर पड़ा है. अब इसी कड़ी में CRISIL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में आम आदमी की रसोई पर महंगाई का असर मिश्रित रहा. जहां कुछ जरूरी चीजें महंगी हुईं, वहीं कई खाद्य पदार्थ सस्ते होने से कुल खर्च पर बड़ा असर नहीं पड़ा. शाकाहारी थाली की लागत स्थिर रही, जबकि मांसाहारी थाली 1% सस्ती हुई.
टमाटर महंगा, लेकिन असर संतुलित
शाकाहारी थाली के स्थिर रहने की मुख्य वजह टमाटर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है. मार्च 2025 में 21 प्रति किलो मिलने वाला टमाटर अब 28 प्रति किलो हो गया, यानी 33% की बढ़त. इसकी वजह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में फसल की बुवाई में देरी और कम सप्लाई रही. हालांकि, अन्य सब्जियों की गिरती कीमतों ने इस असर को संतुलित कर दिया.
प्याज और आलू ने दी राहत
टमाटर की महंगाई के बावजूद प्याज और आलू की कीमतों में बड़ी गिरावट ने राहत दी. प्याज 25% और आलू 13% सस्ता हुआ है. इसके पीछे बंपर उत्पादन, कम निर्यात और होटल-रेस्टोरेंट की कमजोर मांग प्रमुख कारण रहे. इन गिरती कीमतों ने थाली के कुल खर्च को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाई.
नॉन-वेज थाली क्यों हुई सस्ती
मांसाहारी थाली की लागत में करीब 50% हिस्सा चिकन (ब्रोयलर) का होता है. इस बार ब्रोयलर के दाम में 2% की गिरावट आई है, जिससे नॉन-वेज थाली की कीमत सालाना आधार पर 1% कम हो गई. इसे ‘हाई बेस इफेक्ट’ का भी परिणाम माना जा रहा है.
गैस और तेल ने बढ़ाया खर्च
राहत के बावजूद कुछ जरूरी चीजों ने खर्च बढ़ाया है. ग्लोबल सप्लाई दिक्कतों के कारण खाने के तेल के दाम 6% और LPG सिलेंडर 14% महंगा हुआ है. इसके अलावा दालों की कीमतें अधिक स्टॉक के चलते नियंत्रित रहीं. अगर गैस और तेल महंगे न होते, तो थाली की लागत और कम हो सकती थी.
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