Atal Pension Yojana extended till 2031: मोदी सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. जिससे असंगठित और कम इनकम वाले सेक्टर के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है. इस फैसले से उन मजदूरों को सीधा फायदा होगा. जिनके पास रिटायरमेंट के बाद इनकम का कोई रेगुलर सोर्स नहीं है. सरकार के इस कदम को बुढ़ापे में फाइनेंशियल सिक्योरिटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
कैबिनेट के फैसले के तहत अटल पेंशन योजना के लिए सरकारी मदद जारी रहेगी. इसमें योजना से जुड़ी प्रमोशनल एक्टिविटी, कैपेसिटी बिल्डिंग और डेवलपमेंट के लिए फंडिंग शामिल है. इसके अलावा योजना की फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए गैप फंडिंग को भी मंजूरी दी गई है, ताकि भविष्य में पेंशन पेमेंट में कोई रुकावट न आएज.
गारंटी मंथटी पेंशन
अटल पेंशन योजना के तहत एलिजिबल लाभार्थियों को 60 साल की उम्र के बाद 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की गारंटीड मंथली पेंशन मिलती है. पेंशन की रकम लाभार्थी के योगदान पर निर्भर करती है. यह योजना खास तौर पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों दिहाड़ी मजदूरों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए बनाई गई है, जिनके पास कोई फॉर्मल पेंशन सुविधा नही है.
फाइनेंशियल सिक्योरिटी का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि अटल पेंशन योजना बुढ़ापे में रेगुलर इनकम का सोर्स देती है, और ज्यादा से ज्यादा लोगों को फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़ने में मदद करती है. इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए जागरूकता बढ़ाने और योजना को ठीक से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है. कैबिनेट का मानना है कि योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार सरकारी मदद जरूरी है.
पेंशन वाले समाज का विजन
9 मई 2015 को शुरू की गई अटल पेंशन योजना का मकसद देश में एक पेंशन वाला समाज बनाना है. जहां हर व्यक्ति रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल रूप से आत्मानिर्भर हो सके. छोटे लेकिन रेगुलर योगदान के जरिए, यह योजना लाखों लोगों को सुरक्षित भविष्य का भरोसा देती है.
लाखों लोगों का भरोसा
सरकारी आकड़े के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग अटल पेंशन योजना से जुड़ चुके है. सरकार का मानना है कि योजना की लोकप्रियता और सस्टेनेबिलिटी बनाए रखने के लिए लंबे समय तक काम किया है. यह कैबिनेट का फैसला साफ तौर पर दिखता है कि सरकार सोशल सिक्योरिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रही है.