Anil Agarwal Net Worth: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की उम्र में 7 जनवरी को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया. अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें अस्पताल में ही कार्डियक अरेस्ट आया, जहां उनका निधन हो गया.
अनिल अग्रवाल ने खुद सोशल मीडिया पर इस घटना को अपनी जिंदगी का सबसे काला दिन बताया. उन्होंने लिखा कि अग्निवेश स्कीइंग हादसे के बाद न्यूयॉर्क के अस्पताल में रिकवर कर रहे थे, लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट से सब कुछ बदल गया. परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है.
हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया- अनिल अग्रवाल
उन्होंन पोस्ट में लिखा- “आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है. मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा. एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाये, इससे बुरा और क्या हो सकता है. अग्निवेश अपने दोस्त के साथ अमेरिका में Skiing करने गया था. वहां एक्सीडेंट हो गया. वो Mount Sinai Hospital, New York में ठीक हो रहा था. हमें लगा सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अचानक Cardiac Arrest हो गया और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया.”
अनिल अग्रवाल ने पोस्ट में आगे लिखा- “3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है. एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में जन्मा था अग्नि. तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल आज बहुत याद आ रहा है बेटा. अपनी मां का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था. हमेशा हंसता, हमेशा मुस्कुराता, यारों का यार था वो और अपनी बहन प्रिया को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी.”
‘अग्निवेश जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था’
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन ने लिखा- “उसने Mayo College, Ajmer में पढ़ाई की. बेहद Strong Personality थी अग्नि की- Boxing Champion, Horse Riding का शौकीन और कमाल का Musician. उसने Fujairah Gold जैसी शानदार कंपनी खड़ी की और Hindustan Zinc का Chairman भी बना.
लेकिन इन सबसे ऊपर अग्नि बेहद Simple था. हमेशा अपने Friends और Colleagues के बीच में ही रहता था. जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था. वो हमेशा जमीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा.”
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि वो सिर्फ बेटा नहीं था, वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था. मैं और किरन टूट से गए हैं. बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया. लेकिन, जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं. वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं. अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना. वो हमेशा कहता था- “पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?”
‘कमाई का 75% से ज्यादा समाज के काम में लगाएंगे’
उन्होंने लिखा कि हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और सभी युवाओं को रोजगार मिले. मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75 प्रतिशत से ज्यादा समाज के काम में लगाएंगे. आज फिर वो वादा दोहराता हूं. अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा.
उन्होंने लिखा- “हम उन सभी मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का दिल से धन्यवाद करते हैं जो हमेशा अग्निवेश के साथ रहे. अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि. तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी. कितने सपने थे, कितने अरमान थे, सब कुछ अधूरा ही रह गया. समझ नहीं आता, तुम्हारे बिना अब जिंदगी कैसे कटेगी बेटा. तुम्हारे बिना जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा.”
किससे हुई थी अग्निवेश अग्रवाल की शादी?
बता दें कि अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था. वे अग्निवेश वेदांता ग्रुप की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड के बोर्ड में शामिल थे. अग्निवेश अग्रवाल की शादी की जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी शादी 2001 में पूजा बांगर से हुई थी.
पूजा, श्री सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर हरि मोहन बांगर की बेटी हैं. वहीं अग्निवेश की बहन प्रिया अग्रवाल हेब्बर हैं, जो अभी हिंदुस्तान जिंक की चेयरपर्सन और वेदांता में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
अग्निवेश अग्रवाल की नेटवर्थ का कोई आधिकारिक या सार्वजनिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. हालांकि, वे देश के सबसे अमीर परिवारों में से एक अग्रवाल परिवार की अरबों की संपत्ति के वारिस थे.
अनिल अग्रवाल के पास कितनी संपत्ति?
फोर्ब्स की जुलाई 2025 लिस्ट के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति बन चुके हैं. हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में वे 16वें स्थान पर हैं, जबकि एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स में चौथे स्थान पर हैं.
गौरतलब है कि अनिल अग्रवाल ने 1976 में स्क्रैप मेटल ट्रेडिंग से वेदांता की शुरुआत की थी. आज यह दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल रिसोर्स कंपनियों में से एक है.