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Bihar Protest: पालीगंज अनुमंडल कार्यालय पर माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों की मनमानी के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त आंदोलन

Bihar Protest: पालीगंज अनुमंडल कार्यालय पर माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों की मनमानी के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त आंदोलन

Published by Swarnim Suprakash

पालीगंज, पटना से धर्मेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Bihar Protest: आज पालीगंज अनुमंडल कार्यालय पर सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं और गरीब परिवारों ने माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों की मनमानी, अवैध वसूली और आरबीआई के नियमों के उल्लंघन के ख़िलाफ़ जबरदस्त आंदोलन किया। आंदोलन का केंद्र दुल्हिनबाजार प्रखंड के काब गाँव के निवासी सियाराम साव की आत्महत्या थी, जिन्हें माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों के क़र्ज़ और वसूली के आतंक ने मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया।

सियाराम साव की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार कौन?

आंदोलन के दौरान यह माँग उठी कि सियाराम साव की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और दोषियों पर मुक़दमा दर्ज हो। मृतक परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए। गरीब परिवारों द्वारा लिए गए 1 लाख रुपये से कम के सभी माइक्रोफ़ाइनेंस लोन को तत्काल माफ़ किया जाए। माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए नियामक संस्था का गठन किया जाए। साथ ही जीविका समूहों की सभी महिलाओं को रोजगार, प्रत्येक पंचायत में सरकारी बैंक और महिलाओं को 2% सालाना ब्याज दर पर 2 लाख रुपये तक का कर्ज़ उपलब्ध कराया जाए।

आंदोलन के उपरांत एक प्रतिनिधिमंडल ने पालीगंज अनुमंडल पदाधिकारी और डीएसपी से मुलाक़ात की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि काब गाँव की घटना में दोषी माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनी पर मुक़दमा दर्ज कराया जाएगा और अन्य माँगों को सरकार तक पहुँचाया जाएगा।

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विधायक डॉ. संदीप सौरभ ने कहा

पालीगंज विधायक डॉ. संदीप सौरभ ने कहा, “बिहार में माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों ने गरीबों का जीना दुश्वार कर दिया है। कर्ज़ के जाल और सूदखोरी के आतंक ने दर्जनों गरीब परिवारों को आत्महत्या और उजड़ने के कगार पर पहुँचा दिया है। यह सिर्फ़ एक आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार की विफलता और इन कंपनियों को मिली खुली छूट का नतीजा है। जब तक गरीबों को लूटने वाली कंपनियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

इन कंपनियों की लूट पर रोक लगानी चाहिए

एपवा महासचिव मीना तिवारी ने कहा, “ग्रामीण महिलाएँ माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों के कभी न ख़त्म होने वाले क़र्ज़ और ब्याज के चक्र में फँसकर बरबाद हो रही हैं। इन कंपनियों का जाल महिलाओं को ग़रीबी से निकालने के बजाय और गहरी खाई में धकेल रहा है। सरकार अगर सचमुच महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करती है तो उसे तुरंत हस्तक्षेप कर इन कंपनियों की लूट पर रोक लगानी होगी।”

आंदोलन में माले नेता अनवर हुसैन, सुरेंद्र पासवान, अमरसेन दास, मंगल यादव, मुमताज अंसारी, आशा देवी, विनेश चौधरी, राजेश कुमार, नागो देवी समेत सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।

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