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Bihar News: महाभारत शो में दुर्योधन बने ‘पुनीत इस्सर’ ने किया गयाजी में पिंडदान

Bihar News: महाभारत शो में दुर्योधन का पत्र निभाने वाले 'पुनीत इस्सर' ने बिहार के गयाजी में पिंडदान किया और साथ ही उन्होंने पितृपक्ष मेले में सुव्यवस्था की सराहना भी की।

Published by Swarnim Suprakash

गयाजी, बिहार से कुंदन गुप्ता की रिपोर्ट 
Bihar News: लोकप्रिय टीवी धारावाहिक महाभारत में दुर्योधन की भूमिका निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले सुप्रसिद्ध कलाकार पुनीत इस्सर ने सोमवार को मोक्षस्थली बिहार के गयाजी पहुंचकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पिंडदान किया। 

पितृपक्ष मेले में की गई व्यवस्था की सराहना

उन्होंने फल्गु नदी तट पर विधिवत श्राद्ध-कर्म सम्पन्न किया। विष्णुपद मंदिर भी पहुंचे और वहां भी कर्मकांड किया. इस मौके पर उनके परिवार के कई अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। पिंडदान के उपरांत अभिनेता पुनीत इस्सर ने पितृपक्ष मेले में की गई व्यवस्था की सराहना की। 

‘गयाजी’ विश्वभर में पिंडदान के लिए विख्यात

उन्होंने कहा कि गयाजी विश्वभर में पिंडदान के लिए विख्यात है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार और प्रशासन ने बेहतर इंतजाम किए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि गयाजी आकर उन्हें आध्यात्मिक संतोष और शांति की अनुभूति हुई। 

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बिहार के बारे में जो भी सुना था उससे विपरीत पाया

बिहार अब पहले जैसा नहीं है। उन्होंने कहा, मैं निःशब्द रह गया। बिहार के बारे में जो भी सुना था, उससे विपरीत पाया। इतनी बढ़िया व्यवस्था, आप रास्ते कहिए या अन्य सुविधाएं, बिहार पहले जैसा बिहार नहीं है। मैं हवाई अड्डे से यहां मेला क्षेत्र आया। सभी जगह व्यवस्थाएं अच्छी नजर आई।  

प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष में देश के कई जाने माने हस्ती गयाजी पहुंचकर पिंडदान करते हैं

बता दें कि हर साल पितृपक्ष में देश के कई जाने माने हस्ती गयाजी पहुंचकर पिंडदान करते हैं।  पिछले कुछ वर्षो की बात करें तो पूर्व उपराष्ट्रपति जयदीप धनखड, वित मंत्री निर्मला सीतारमन, संजय दत्त, बिहार के पूर्व राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर सहित कई मंत्री, सांसद, विधायक पहुंचते है।  

बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के मोक्ष तथा शांति के लिए पिंडदान करने के लिए गयाजी आते हैं

प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार अपने पितरों के मोक्ष तथा शांति के लिए पिंडदान करने के लिए गयाजी आते हैं। यहां विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षय वट एवं अन्य कई पवित्र स्थानों पर स्थित वेदियों पर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। 

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