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Ballia Politics: भृगु मंदिर में परशुराम जयंती से सियासी संग्राम, क्या बदलेगा बलिया का समीकरण?

Ballia Politics:  बलिया में 19 अप्रैल को भृगु मंदिर परिसर में आयोजित होने वाला भगवान परशुराम जयंती कार्यक्रम सियासी रूप लेता जा रहा है. भाजपा नेता बबलू तिवारी के इस आयोजन को मंदिर निर्माण और कॉरिडोर की मांग के साथ-साथ ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

By: Ranjana Sharma | Published: April 18, 2026 3:36:16 PM IST



Ballia Politics: उत्तर प्रदेश के बलिया में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच भृगु मंदिर परिसर में 19 अप्रैल को प्रस्तावित भगवान परशुराम जयंती कार्यक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया है. बाहर से धार्मिक दिखने वाला यह आयोजन अंदरखाने चुनावी रणनीति और वोट बैंक साधने के बड़े प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है. भाजपा नेता बबलू तिवारी के इस कार्यक्रम को लेकर अब चर्चाएं तेज हैं कि क्या यह आयोजन बलिया की सियासत में गेमचेंजर साबित होगा.

19 अप्रैल का कार्यक्रम बना चर्चा का केंद्र

भृगु मंदिर परिसर में होने जा रहे इस कार्यक्रम में बीजेपी के कई बड़े नेता शामिल होने वाले हैं. इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, गोरखपुर के सांसद रवि किशन और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में मंच साझा करेंगे. कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं और हजारों लोगों के जुटने की उम्मीद है.

तीन बड़े लक्ष्य: मंदिर, कॉरिडोर और सामाजिक संदेश

आयोजक बबलू तिवारी के अनुसार इस कार्यक्रम के तीन मुख्य उद्देश्य हैं. पहला, भृगु मंदिर परिसर में भगवान परशुराम के भव्य मंदिर निर्माण की घोषणा कराना. दूसरा, भृगु कॉरिडोर के विकास को गति देना. और तीसरा, भगवान परशुराम को किसी एक जाति तक सीमित न रखकर उन्हें सर्वजन का पूजनीय स्थापित करना. इसके साथ ही 4 से 5 हजार लोगों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है.

सियासी नजर से ‘शक्ति प्रदर्शन’ या ‘डैमेज कंट्रोल’?

राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को अलग नजरिए से देखा जा रहा है. इसे ब्राह्मण वोट बैंक को साधने और बीजेपी के पक्ष में माहौल तैयार करने की रणनीति माना जा रहा है. हाल के समय में क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ी है. मेडिकल कॉलेज, जिला कारागार और बस अड्डे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अधूरे हैं, वहीं भृगु कॉरिडोर में देरी भी लोगों के बीच असंतोष का कारण बनी हुई है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह धार्मिक आयोजन चुनावी समीकरण बदल पाएगा. स्थानीय राजनीति में यह चर्चा तेज है कि क्या इस मंच से की जाने वाली घोषणाएं और संदेश जनता का रुख बदलने में सफल होंगे या नहीं.

आयोजक का दावा: समाज को जोड़ने की पहल

विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए बबलू तिवारी ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि किसी एक वर्ग को साधना. उन्होंने भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार बताते हुए कहा कि उन्हें किसी एक जाति तक सीमित करना गलत सोच है. उनका प्रयास सभी वर्गों को साथ लाने का है.

19 अप्रैल पर टिकीं बलिया की निगाहें

अब बलिया की राजनीति में 19 अप्रैल का यह आयोजन एक अहम मोड़ बनता नजर आ रहा है. यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी चुनाव की दिशा तय करने वाला मंच भी बन सकता है. जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस कार्यक्रम से क्या घोषणाएं होती हैं और उनका चुनावी असर कितना गहरा पड़ता है.
 
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