Varuthini ekadashi 2026: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाने वाली वरुथिनी एकादशी इस वर्ष 13 अप्रैल 2026, सोमवार को पड़ रही है. यह व्रत भगवान भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है और हिंदू धर्म में इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वैशाख माह स्वयं भगवान विष्णु को प्रिय होता है, इसलिए इस माह में आने वाली एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है. हालांकि इस व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब व्रती नियमों का पालन करते हुए सात्विक आहार ग्रहण करे और निषिद्ध चीजों से दूरी बनाए रखे.
व्रत का महत्व: पापों से मुक्ति और सौभाग्य की प्राप्ति
क्या खाएं
- फल जैसे केला, सेब, संतरा, अंगूर और पपीता खा सकते हैं, ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं
- दूध, दही, छाछ और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद शुद्ध और सात्विक माने जाते हैं
- बादाम, काजू, किशमिश और अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स ऊर्जा बनाए रखते हैं
- आलू, शकरकंद और अरबी को उबालकर या हल्का पकाकर खाया जा सकता है
- कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी रोटी, पूरी या पकौड़े खाए जा सकते हैं
- साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या खीर व्रत के लोकप्रिय और ऊर्जा देने वाले विकल्प हैं
- पर्याप्त पानी, नारियल पानी या नींबू पानी पीना फायदेमंद रहता है
किन चीजों से करें परहेज
- चावल, गेहूं और सामान्य अनाज का सेवन न करें
- दालों का सेवन (विशेषकर उड़द, चना, मसूर) नहीं करना चाहिए
- मक्का और सरसों (राई) से बने खाद्य पदार्थों से बचें
- सामान्य भोजन जैसे रोटी, पराठा, इडली, डोसा न खाएं
- प्याज और लहसुन का सेवन न करें, इन्हें तामसिक माना जाता है
- मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी भोजन से पूरी तरह दूरी रखें
- अधिक तेल और मसालेदार भोजन से बचें, ताकि व्रत की सात्विकता बनी रहे
व्रत की विधि: कैसे करें पूजा और पालन
पारण का समय: सही समय पर ही खोलें व्रत
- वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल 2026 को किया जाएगा.
- पारण का समय: सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक
हरि वासर समाप्ति: सुबह 6:54 बजे - ध्यान रखें कि हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है.