Home > धर्म > Sheetla Saptami: कब है शीतला सप्तमी? ये काम करके जगाएं अपना भाग्य, जानें पूजा विधि और नियम

Sheetla Saptami: कब है शीतला सप्तमी? ये काम करके जगाएं अपना भाग्य, जानें पूजा विधि और नियम

Sheetla Saptami: शीतला सप्तमी का व्रत मां शीतला को समर्पित होता है और इसे चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन पूजा के बाद अष्टमी पर ठंडा या एक दिन पहले बना भोजन प्रसाद के रूप में खाया जाता है.

By: Ranjana Sharma | Last Updated: March 9, 2026 9:36:50 AM IST



Sheetla Saptami: हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत मां शीतला को समर्पित होता है और हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भक्त सुबह स्नान करके माता की पूजा, कथा और प्रसाद अर्पित करते हैं. मान्यता है कि इस व्रत को रखने से परिवार के सदस्यों को गर्मियों में होने वाली बीमारियों से रक्षा मिलती है और बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है.

क्या है शीतला सप्तमी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला सप्तमी का व्रत रखने से चेचक, बुखार, फोड़े-फुंसी और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव का आशीर्वाद मिलता है. खासतौर पर महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं. ऐसा भी माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

शीतला अष्टमी पर क्यों नहीं बनता ताजा खाना

शीतला सप्तमी के बाद आने वाले दिन को शीतला अष्टमी या बसोड़ा कहा जाता है. इस दिन एक खास नियम का पालन किया जाता है-घर में ताजा खाना नहीं बनाया जाता. परंपरा के अनुसार सप्तमी की शाम या रात में ही खाना बनाकर रख लिया जाता है, जिसे अगले दिन अष्टमी पर ठंडा या बासी प्रसाद के रूप में खाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन चूल्हा न जलाने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों से बचाती हैं.

कब बनाया जाता है खाना

शीतला सप्तमी के दिन दोपहर या शाम से लेकर रात तक खाना बनाना शुभ माना जाता है. इसी समय पूरे परिवार के लिए खाना और प्रसाद तैयार किया जाता है. अगले दिन अष्टमी पर वही खाना प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है, ताकि उस दिन घर में चूल्हा न जलाना पड़े.

मां शीतला को क्यों लगाया जाता है बासी भोग

इस दिन मां शीतला को खासतौर पर मीठे चावल का भोग लगाया जाता है. ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं. परंपरा के अनुसार यह भोग सप्तमी की रात को ही तैयार कर लिया जाता है. पूजा के बाद यही प्रसाद घर के सभी सदस्यों में बांटा जाता है. व्रत रखने वाले लोग भी इन्हीं मीठे चावल का सेवन करके व्रत पूरा करते हैं.

व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला सप्तमी का व्रत करने से बच्चों की सेहत अच्छी रहती है और कई तरह की बीमारियों से रक्षा होती है. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से बुखार, आंखों से जुड़ी समस्याएं और मौसमी रोगों से राहत मिलती है. यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है.

Advertisement