Nervous weakness : तंत्रिकाएं हमारे शरीर की संचार प्रणाली की तरह काम करती हैं. ये दिमाग से शरीर के हर हिस्से तक संदेश पहुंचाती हैं. जब नसें कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो शरीर में झनझनाहट, सुन्नपन, दर्द, कमजोरी या संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इसके पीछे कई गंभीर बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं. जानिए किन बीमारियों से होती है तंत्रिका कमजोरी?
डायबिटीज
डायबिटीज तंत्रिका कमजोरी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहने से नसों की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं. इससे नसों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता. लक्षण: पैरों में जलन, सुन्नपन, सुई चुभने जैसा अहसास, रात में दर्द बढ़ना. इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है.
विटामिन बी12 और बी कॉम्प्लेक्स की कमी
विटामिन बी12, बी6 और बी1 नसों की सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं. इनकी कमी से नसों की बाहरी परत (माइलिन शीथ) को नुकसान पहुंच सकता है. लक्षण: हाथ-पैरों में झनझनाहट, चलने में अस्थिरता, याददाश्त में कमी, कमजोरी. शाकाहारी लोगों या पेट की बीमारियों से जूझ रहे लोगों में बी12 की कमी ज्यादा देखी जाती है.
थायरॉयड
जब थायरॉयड ग्रंथि कम सक्रिय हो जाती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है. इससे नसों पर दबाव और सूजन आ सकती है.
ऑटोइम्यून रोग
कुछ बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही नसों पर हमला कर देती है.
गिलियन-बैरे सिंड्रोम
मल्टीपल स्क्लेरोसिस इन स्थितियों में नसों की कार्यक्षमता तेजी से प्रभावित हो सकती है.
किडनी और लीवर की बीमारी
जब किडनी या लीवर ठीक से काम नहीं करते, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं. ये विषैले तत्व नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
अत्यधिक शराब का सेवन
लंबे समय तक ज्यादा शराब पीने से पोषण की कमी और सीधे तौर पर नसों को नुकसान हो सकता है. इसे अल्कोहॉलिक न्यूरोपैथी कहा जाता है.
लक्षण: पैरों में दर्द, जलन, चलने में कठिनाई.
संक्रमण और अन्य कारण
- कुछ वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, जैसे एचआईवी या लाइम रोग, भी नसों को प्रभावित कर सकते हैं.
इसके अलावा कीमोथेरेपी, चोट या लंबे समय तक दबाव भी तंत्रिका क्षति का कारण बन सकते हैं. - तंत्रिका कमजोरी के सामान्य लक्षण
- हाथ-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट
- जलन या चुभन जैसा दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी
- संतुलन बिगड़ना
- स्पर्श या तापमान का सही अहसास न होना
तंत्रिकाओं को मजबूत करने के उपाय
- संतुलित आहार: विटामिन बी12, बी6, ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें.
- ब्लड शुगर कंट्रोल: डायबिटीज मरीज नियमित जांच कराएं.
- नियमित व्यायाम: योग, वॉक और स्ट्रेचिंग रक्त संचार बेहतर करते हैं.
- नशे से दूरी: शराब और धूम्रपान से बचें.
- समय पर इलाज: लगातार लक्षण दिखें तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें.