Kidney disease children: आजकल बच्चों में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. पहले जहां किडनी की समस्या को बड़ों की बीमारी माना जाता था, वहीं अब कम उम्र के बच्चों में भी संक्रमण, पथरी और यहां तक कि क्रॉनिक किडनी डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली और खानपान इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं.
क्यों बढ़ रही हैं गुर्दे की बीमारियां?
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में जंक फूड, अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बढ़ा है. कम पानी पीना, बार-बार होने वाले यूरिन संक्रमण, मोटापा, डायबिटीज की शुरुआती स्थिति और जन्मजात किडनी विकार भी प्रमुख कारण हैं. इसके अलावा, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन और बार-बार दर्दनिवारक दवाओं का इस्तेमाल भी किडनी पर असर डाल सकता है.
छिपे हुए कारण
कई बार किडनी की बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते. हाई ब्लड प्रेशर, अनियंत्रित शुगर, बार-बार डिहाइड्रेशन और परिवार में किडनी रोग का इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकता है.
शुरुआती लक्षण क्या हैं?
- पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आना
- पेशाब का रंग गहरा या झागदार होना
- चेहरे, आंखों या पैरों में सूजन
- थकान और कमजोरी
- भूख कम लगना
- पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
- यदि ये लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए.
क्या करें?
विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों को पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें. संतुलित और कम नमक वाला आहार दें. जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक से दूरी रखें. बार-बार संक्रमण होने पर जांच जरूर कराएं. नियमित हेल्थ चेकअप, खासकर ब्लड प्रेशर और यूरिन टेस्ट, गंभीर नुकसान से बचा सकते हैं. समय रहते पहचान और सही इलाज से किडनी की बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. इसलिए माता-पिता को बच्चों की छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.