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Trump Tariff: भारत समेत दुनिया के कई देशों पर लगाए गए टैरिफ अवैध, अमेरिकी कोर्ट का ट्रंप को बड़ा झटका

US supreme court Trump tariff: शुक्रवार का यह फैसला तब आया जब ट्रंप ने टैरिफ – इंपोर्टेड सामान पर टैक्स – को एक अहम इकॉनमिक और फॉरेन पॉलिसी टूल के तौर पर इस्तेमाल किया.

By: Shubahm Srivastava | Last Updated: February 20, 2026 9:23:30 PM IST



USA Supreme Court On Tariff: यूएस सुप्रीम कोर्ट ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के बड़े टैरिफ को रद्द कर दिया है, जिन्हें उन्होंने नेशनल इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाले कानून के तहत लागू किया था. कोर्ट ने उनके सबसे विवादित दावों में से एक को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने अधिकार के बारे में कहा था कि इसका ग्लोबल इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ेगा.

शुक्रवार का यह फैसला तब आया जब ट्रंप ने टैरिफ – इंपोर्टेड सामान पर टैक्स – को एक अहम इकॉनमिक और फॉरेन पॉलिसी टूल के तौर पर इस्तेमाल किया.

ग्लोबल इकॉनमिक पर पड़ा असर

ये उस ग्लोबल ट्रेड वॉर के सेंटर रहे हैं जिसे ट्रंप ने प्रेसिडेंट के तौर पर अपना दूसरा टर्म शुरू करने के बाद शुरू किया था, जिसने ट्रेडिंग पार्टनर्स को अलग-थलग कर दिया, फाइनेंशियल मार्केट पर असर डाला और ग्लोबल इकॉनमिक अनिश्चितता पैदा की.

जिन टैरिफ पर असर नहीं पड़ा

इंडस्ट्री-स्पेसिफिक स्टील, एल्युमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोटिव टैरिफ, जिन्हें नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं का हवाला देते हुए 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत लागू किया गया था. डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ सिस्टम को कानूनी चुनौती प्रेसिडेंशियल पावर की लिमिट के एक अहम टेस्ट के तौर पर सामने आई है, कोर्ट के फैसले के ग्लोबल इकॉनमी पर दूरगामी नतीजे होने की संभावना है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?

12 जनवरी, 2026 को, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ पर यूनाइटेड स्टेट्स के खिलाफ फैसला देता है, तो देश को सैकड़ों बिलियन डॉलर के रीपेमेंट का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने आगे कहा कि इस अनुमान में उन देशों और कंपनियों के संभावित कम्पनसेशन क्लेम शामिल नहीं होंगे जिन्होंने टैरिफ पेमेंट से बचने के लिए नए प्लांट, फैक्ट्री और इक्विपमेंट में इन्वेस्ट किया था.

टैरिफ के खिलाफ फैसला अमेरिका के लिए बड़ा खतरा

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे इन्वेस्टमेंट को मिलाकर, फाइनेंशियल बोझ ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसे देश के लिए मैनेज करना बहुत मुश्किल होगा और इसे कैलकुलेट करने और सेटल करने में शायद सालों लग सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ के खिलाफ फैसला अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी पर आधारित ट्रेड पॉलिसी को बड़ा झटका देगा.

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