Late Night Sleep: आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी में व्यस्त रहते हैं और 11 बजे के बाद सोते हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत वजन कम करने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है. एक चिकित्सक के अनुसार, देर रात तक जागना शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे फैट बर्निंग यानी वसा का क्षय धीमा हो जाता है.
कैसे प्रभावित होता है मेटाबॉलिज्म
डॉक्टर बताते हैं कि हमारा शरीर एक जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिद्म पर काम करता है. जब हम नियमित समय से देर से सोते हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. रात के समय शरीर रिपेयर और रिकवरी मोड में जाता है, लेकिन देर से सोने पर यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है. इससे कैलोरी बर्न कम होती है और वजन घटाना कठिन हो जाता है.
हार्मोनल असंतुलन भी है कारण
देर रात तक जागने से शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ जाता है, जबकि पेट भरा होने का संकेत देने वाला ‘लेप्टिन’ कम हो जाता है. ऐसे में व्यक्ति को देर रात भूख ज्यादा लगती है और स्नैकिंग की आदत बढ़ जाती है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होती रहती है.
नींद का भी पड़ता है असर
11 बजे के बाद सोने से अक्सर नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. पर्याप्त और गहरी नींद न मिलने से अगले दिन थकान और सुस्ती महसूस होती है. इससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और यह भी वजन बढ़ने या कम न होने का एक कारण बनता है.
सही समय पर सोना क्यों जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि वजन घटाने के लिए केवल डाइट और एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं हैं. नियमित और समय पर नींद लेना भी उतना ही जरूरी है. रात 10 से 11 बजे के बीच सोने की आदत मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में मदद करती है और शरीर को बेहतर तरीके से फैट बर्न करने का मौका देती है.