Mahashivratri puja vidhi: महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सबसे बड़ा और पावन पर्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और रातभर जागरण कर शिव नाम का जाप करते हैं. कहा जाता है कि इस दिन की गई सच्ची भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. लेकिन कुछ ऐसे कार्य हैं, जिनसे इस दिन विशेष रूप से बचना चाहिए.
तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें
महाशिवरात्रि के दिन शरीर और मन दोनों की पवित्रता आवश्यक मानी जाती है. इसलिए मांस, मछली, अंडा, शराब, सिगरेट या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए. लहसुन-प्याज जैसे तामसिक पदार्थों से भी परहेज करना बेहतर माना जाता है.
व्रत के दौरान फलाहार, दूध, फल, साबूदाना, कुट्टू या सिंहाड़े के आटे से बने व्यंजन जैसे सात्विक भोजन ही ग्रहण करें. इससे मन शांत रहता है और पूजा में एकाग्रता बनी रहती है.
आलस और अधिक नींद से बचें
यह दिन साधना, संयम और जागरण का होता है. देर तक सोना या दिनभर आराम करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. रात में शिव नाम का जाप, भजन-कीर्तन या ध्यान करना शुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस रात जागरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
गुस्सा, विवाद और अपशब्दों से दूरी रखें
महाशिवरात्रि का संदेश शांति और आत्मसंयम है. इस दिन किसी से झगड़ा करना, अपशब्द बोलना या मन में द्वेष रखना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है.
कोशिश करें कि पूरे दिन सकारात्मक सोच रखें, जरूरतमंदों की मदद करें और विनम्र व्यवहार करें. मन की शुद्धता ही सच्ची पूजा मानी जाती है.
शिवलिंग पर गलत सामग्री अर्पित न करें
पूजा करते समय सही विधि और सामग्री का ध्यान रखना जरूरी है. शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए. तुलसी दल भी शिव पूजा में वर्जित माना जाता है. इसके स्थान पर शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं. बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह तीन पत्तियों वाला और साफ हो.
व्रत के नियमों की अनदेखी न करें
यदि आपने महाशिवरात्रि का व्रत रखा है तो नियमों का पालन पूरी श्रद्धा से करें. बार-बार खाना, झूठ बोलना या दिखावे के लिए व्रत रखना धार्मिक रूप से उचित नहीं माना जाता. व्रत का उद्देश्य आत्मसंयम और भक्ति है, इसलिए पूरे दिन मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें. जरूरतमंदों को दान देना और भगवान शिव का स्मरण करते रहना भी शुभ माना जाता है.